सुप्रीम कोर्ट ने जहाज़ की ज़ब्ती का आदेश रद्द किया, कहा- सही तरीके से बेयरबोट चार्टर खत्म होने पर डिमाइस चार्टर भी खत्म हो जाता है

  • सुप्रीम कोर्ट ने जहाज़ की ज़ब्ती का आदेश रद्द किया, कहा- सही तरीके से बेयरबोट चार्टर खत्म होने पर डिमाइस चार्टर भी खत्म हो जाता है

    समुद्री और एडमिरल्टी कानूनों के संदर्भ में एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 सितंबर) को कहा कि जब जहाज़ का मालिक सही तरीके से डिमाइस या बेयरबोट चार्टर को खत्म करता है तो चार्टर खत्म हो जाता है, भले ही मालिक ने अभी तक जहाज़ का कब्ज़ा वापस न लिया हो।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने एडमिरल्टी (समुद्री दावों का अधिकार क्षेत्र और निपटान) अधिनियम, 2017 की धारा 5(1)(b) और धारा 5(2) के तहत जहाज़ M.V. Nereus Progress की ज़ब्ती से जुड़े विवाद पर सुनवाई की।

    Nereides Marine Services, BIMCO BARECON 2017 चार्टरपार्टी के तहत जहाज़ की डिमाइस चार्टरर थी। Nereides द्वारा किराया न चुकाने पर मालिक ने 6 नवंबर, 2025 को एक 'एंटी-टेक्निकैलिटी नोटिस' जारी किया और बाद में क्लॉज़ 31 के तहत 13 नवंबर को चार्टर खत्म कर दिया।

    मालिक ने 19 नवंबर को 'रीपज़ेशन नोटिस' (कब्ज़ा वापस लेने का नोटिस) जारी किया। तूतीकोरिन में जहाज़ का कब्ज़ा वापस लिए जाने से पहले, Om Freight Forwarders Ltd. ने—जिसने Nereides को एक और जहाज़ अलग से चार्टर पर दिया और उससे बकाया राशि का दावा कर रही थी—4 दिसंबर को M.V. Nereus Progress को ज़ब्त करने का आदेश प्राप्त कर लिया।

    मद्रास हाईकोर्ट ने ज़ब्ती का आदेश रद्द करने से इनकार किया और कहा कि डिमाइस चार्टर आमतौर पर तब तक जारी रहता है, जब तक कि कब्ज़ा वापस न ले लिया जाए या जहाज़ वापस न सौंप दिया जाए।

    हाईकोर्ट के फैसले से असहमति जताते हुए CJI कांत द्वारा लिखे गए फैसले में मुख्य रूप से BARECON 2017 चार्टरपार्टी के क्लॉज़ 32 का हवाला दिया गया। इस क्लॉज़ में कहा गया कि चार्टर खत्म होने के बाद और कब्ज़ा वापस लेने तक, चार्टरर मालिक के लिए जहाज़ को "सिर्फ़ एक मुफ़्त बेली (gratuitous bailee)" के तौर पर रखेगा। इसका मतलब है कि जो व्यक्ति मुफ़्त बेली के तौर पर जहाज़ रखता है, वह उसी समय उसका डिमाइस चार्टरर नहीं बना रह सकता।

    कोर्ट ने कहा,

    "इस बुनियादी अंतर को देखते हुए Nereides एक ही समय में जहाज़ का 'डिमाइस चार्टरर' और 'ग्रैच्युटस बेली' (बिना किसी शुल्क के सामान रखने वाला) दोनों नहीं हो सकता।"

    कोर्ट ने समझाया कि कॉन्ट्रैक्ट खत्म करना (Termination) और कब्ज़ा वापस लेना (Repossession) दो अलग-अलग बातें हैं। कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने से कानूनी रिश्ता खत्म हो जाता है, जबकि कब्ज़ा वापस लेना जहाज़ का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की बाद की फिजिकल प्रक्रिया है।

    कोर्ट ने कहा,

    "यह नियम कि मालिकों के प्रतिनिधि के जहाज़ पर चढ़ते ही जहाज़ का कब्ज़ा वापस माना जाएगा, सिर्फ़ उस समय को तय करता है जबसे मालिक जहाज़ के ऑपरेशन की ज़िम्मेदारी फिर से संभालते हैं। यह यह तय नहीं करता कि डिमाइस चार्टर असल में कब खत्म होता है।"

    कोर्ट ने यह भी गौर किया कि Nereides द्वारा पेमेंट न करने के बाद मालिक ने तुरंत कार्रवाई की और बार-बार जहाज़ वापस लेने की कोशिश की। फिजिकल कब्ज़ा वापस लेने में हुई देरी मालिक की वजह से नहीं हुई।

    इसके अलावा, कोर्ट ने एडमिरल्टी एक्ट की धारा 5(1)(b) और धारा 5(2) की जांच की। कोर्ट ने कहा कि डिमाइस चार्टरर की देनदारी के आधार पर जहाज़ को ज़ब्त करने के लिए यह दिखाना ज़रूरी है कि ज़ब्ती के समय वह व्यक्ति अभी भी डिमाइस चार्टरर है।

    इस मामले में, 4 दिसंबर को ज़ब्ती से लगभग तीन सप्ताह पहले 13 नवंबर को ही Nereides का चार्टर सही तरीके से खत्म कर दिया गया।

    इसलिए जब जहाज़ ज़ब्त किया गया, तब Nereides डिमाइस चार्टरर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वह फिजिकल कब्ज़ा वापस लिए जाने तक जहाज़ को सिर्फ़ 'ग्रैच्युटस बेली' के तौर पर अपने पास रखे हुए था।

    इसके अनुसार, कोर्ट ने विवादित फ़ैसला रद्द किया और अपील को इन शर्तों के साथ मंज़ूरी दी:

    "(i) अपीलकर्ता द्वारा 13.11.2025 के टर्मिनेशन नोटिस के ज़रिए BBC को खत्म करने से पहले, BBC में शामिल 'एंटी-टेक्निकैलिटी मैकेनिज्म' के साथ क्लॉज़ 31(a) में बताई गई कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का ठीक से पालन किया गया। यह टर्मिनेशन Nereides की तरफ़ से किराया न चुकाने की मानी हुई और लगातार हो रही चूक पर आधारित है, इसलिए इसे सही माना जाता है।

    (ii) BBC के क्लॉज़ 31(a) के तहत सही तरीके से जारी किया गया टर्मिनेशन नोटिस 'डिमाइस चार्टर' को खत्म करने के लिए काफ़ी है। उसके बाद फ़िज़िकल कब्ज़ा लेना सिर्फ़ जहाज़ के कंट्रोल को असल में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया है।

    (iii) टर्मिनेशन नोटिस की वैधता कब्ज़ा लेने की कोशिश में अपीलकर्ता का साफ़ तौर पर सही इरादे वाला व्यवहार और Nereides की तरफ़ से इसके उलट कोई दावा न करना, यह साबित करने के लिए काफ़ी है कि Nereides जहाज़ का 'डिमाइस चार्टरर' जहाज़ की ज़ब्ती की तारीख़ यानी 04.12.2025 से काफ़ी पहले ही नहीं रह गया। उस समय वह BBC के क्लॉज़ 32 के तहत जहाज़ को सिर्फ़ एक 'ग्रैट्यूटस बेली' (बिना किसी फ़ायदे के चीज़ रखने वाला) के तौर पर रखे हुए है।

    (iv) ज़ब्ती का आदेश, जो एक गलत और टिक न सकने वाले आधार पर है, उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता और इसलिए उसे रद्द किया जाता है।"

    Cause Title: Owners and Parties Interested in M.V. Nereus Progress Versus Om Freight Forwarders Ltd.

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story