आवारा कुत्तों की समस्या: राजस्थान हाईकोर्ट ने 'इंसानी जान के लिए खतरा बन सकने वाले' पालतू जानवरों के रजिस्ट्रेशन का निर्देश दिया
Shahadat
1 July 2026 7:52 PM IST

सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन से जुड़े स्वतः संज्ञान (suo moto) मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य को उन सभी पालतू जानवरों (जिनमें कुत्ते भी शामिल हैं) के रजिस्ट्रेशन के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया, "जो इंसानी जान के लिए खतरा बन सकते हैं"। साथ ही इसके लिए एक समय-सीमा तय करने और ऐसा न करने पर दंड का प्रावधान करने को भी कहा।
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया बनानी होगी।
यह भी कहा गया कि कुत्ते के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए सभी कदम उठाए जाएं। साथ ही राज्य के अधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग मिलकर जमीनी स्तर पर ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए लोगों को जागरूक करने के कदम उठाएं।
कोर्ट ने कहा,
"भारत सरकार और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड एक हलफनामा दाखिल करेंगे जिसमें जिला स्तर पर पशु कल्याण बोर्ड स्थापित करने और कुत्ते के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) सुनिश्चित करने के बारे में जानकारी दी जाएगी। राज्य के अधिकारियों और भारत सरकार दोनों को निर्देश जारी करने होंगे कि वे राज्य स्तर पर भारत सरकार के अधीन आने वाले संस्थानों और निजी संस्थानों को अपने-अपने परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए उचित कदम उठाने को कहें।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक सड़कों और उनके आसपास से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए अलग विंग (विभाग) बनाए जाने चाहिए और पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण 'पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023' के अनुसार किया जाना चाहिए।
इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त, 2026 को होगी।
Title: Suo Moto In Re Compliance With The Directions Issued By The Supreme Court In Suo Moto v Union of India

