वैधानिक अपील की व्यवस्था को दरकिनार करने और संवैधानिक अदालतों पर बोझ बढ़ाने के लिए रिट अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
3 Nov 2026 12:39 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने वैधानिक अपील की व्यवस्था को दरकिनार करने के लिए रिट अधिकार क्षेत्र का सहारा लेने की बढ़ती प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने कहा कि असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र को वैधानिक अपील का नियमित विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करने से संवैधानिक अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है और विधायिका द्वारा बनाई गई अपीलीय व्यवस्था अप्रासंगिक हो जाती है। खासकर कर मामलों में, जहां राज्य का राजस्व दांव पर होता है, इस प्रवृत्ति को अनुमति नहीं दी जा सकती।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि अदालत इस बढ़ती प्रवृत्ति पर मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती, जिसमें याचिकाकर्ता मजबूत वैधानिक अपीलीय व्यवस्था को दरकिनार करने के लिए हाईकोर्ट के असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिट अधिकार क्षेत्र को नियमित रूप से वैधानिक अपील के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मामले में याचिकाकर्ता ने जीएसटी फॉर्म MOV-11 के तहत पारित जब्ती आदेश और बैंक गारंटी जमा कराने की मांग करने वाले पत्र को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता खाद्य तेलों के कारोबार का मालिक था। आरोप था कि उसने किसी व्यक्ति से 'सोयाबीन रिफाइंड ऑयल' के नाम पर तेल खरीदा था। परिवहन के दौरान अलवर में राज्य कर अधिकारियों ने ट्रक को रोक लिया। अधिकारियों को संदेह हुआ कि रास्ते में असामान्य बदलाव और टोल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण कर चोरी की जा रही है।
वाहन की भौतिक जांच में दस्तावेजों में दर्ज सोयाबीन तेल के बजाय सरसों का तेल पाया गया। इसके अलावा, जांच के दौरान वाहन चालक स्टीयरिंग लॉक करके मौके से फरार हो गया। इसके बाद अधिकारियों ने माल और वाहन की जब्ती के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उस समय समकक्ष पीठ ने याचिकाकर्ता को बैंक गारंटी जमा कराने की शर्त पर वाहन छोड़ने का निर्देश दिया था। हालांकि, याचिकाकर्ता बैंक गारंटी जमा नहीं कर सका। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने जब्ती का अंतिम आदेश पारित कर दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने दोबारा हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने प्रारंभिक आपत्ति उठाई कि याचिकाकर्ता ने केंद्रीय जीएसटी और राजस्थान जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 107 के तहत उपलब्ध वैधानिक अपील के प्रभावी उपाय का इस्तेमाल नहीं किया।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि मामले में कई जटिल तथ्यात्मक सवाल शामिल हैं। इनमें तेल की वास्तविक रासायनिक प्रकृति, टोल से बचने, कई ई-वे बिल बनाने और परिवहन के दौरान अपनाए गए रास्ते से जुड़े विवाद शामिल हैं। ऐसे तथ्यों की विस्तृत जांच रिट अधिकार क्षेत्र में नहीं की जा सकती।
दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों की आपत्तियों से सहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय GST और राजस्थान GST Act , 2017 एक व्यापक और आत्मनिर्भर कानून है, जिसमें शिकायतों के निवारण के लिए मजबूत वैधानिक व्यवस्था बनाई गई।
खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट को मिला रिट अधिकार क्षेत्र विधायिका द्वारा बनाई गई वैधानिक अपीलीय व्यवस्था को छोटा करने या दरकिनार करने के लिए नहीं है। रिट अदालत जटिल और विवादित साक्ष्यों की दोबारा जांच करने के लिए व्यापक तथ्य-जांच मंच या अपीलीय अदालत की तरह काम नहीं कर सकती।
कोर्ट ने आगे कहा कि अधिनियम की धारा 107 के तहत गठित अपीलीय प्राधिकारी ऐसे साक्ष्यों की जांच और उनका मूल्यांकन करने के लिए वैधानिक रूप से सक्षम है। इसलिए, जहां कानून में प्रभावी अपील का उपाय उपलब्ध है और विवाद में जटिल तथ्यात्मक सवाल शामिल हैं वहां रिट याचिका के जरिए उस व्यवस्था को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।

