“थैलेसीमिया मरीज के केयरगिवर का 1,000 KM दूर ट्रांसफर अमानवीय”: राजस्थान हाईकोर्ट ने UCO Bank का आदेश रद्द किया

  • “थैलेसीमिया मरीज के केयरगिवर का 1,000 KM दूर ट्रांसफर अमानवीय”: राजस्थान हाईकोर्ट ने UCO Bank का आदेश रद्द किया

    राजस्थान हाईकोर्ट ने थैलेसीमिया से पीड़ित भाई के प्राथमिक केयरगिवर को करीब 1,000 किलोमीटर दूर ट्रांसफर करने के UCO Bank के आदेश को रद्द कर दिया।

    जस्टिस अनूप कुमार धंड ने कहा कि हर 15-20 दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत वाले थैलेसीमिया मरीज के केयरगिवर को ऐसी जगह भेजना, जहां आवश्यक चिकित्सा सुविधा और पारिवारिक सहयोग उपलब्ध न हो, मनमाना, अमानवीय और अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य एवं गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।

    याचिकाकर्ता ने बताया कि उसका छोटा भाई थैलेसीमिया से पीड़ित है और 75% स्थायी दिव्यांगता से ग्रस्त है। वह उसका प्राथमिक केयरगिवर है। बैंक की Equal Opportunity Policy के Clause 7 में 40% या उससे अधिक निर्दिष्ट दिव्यांगता वाले आश्रित के केयरगिवर कर्मचारियों को सामान्य ट्रांसफर से छूट का प्रावधान है।

    कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी ने अपने भाई की निर्भरता की जानकारी पहले ही बैंक के सर्विस और HR रिकॉर्ड में दर्ज कराई थी। इसके बावजूद बैंक ने सामान्य ट्रांसफर पॉलिसी को यांत्रिक तरीके से लागू किया और विशेष नीति पर उचित विचार नहीं किया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक की विशेष नीति कोई “दया या परोपकार” नहीं बल्कि वैधानिक दायित्व है। बैंक सार्वजनिक रूप से ऐसी नीति बनाकर उसके विपरीत कार्रवाई नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 'प्रशासनिक बाधाओं' को विशेष नीति से बचने के लिए सामान्य या यांत्रिक अपवाद नहीं बनाया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि विशेष नीति सामान्य ट्रांसफर नीति पर प्राथमिकता रखेगी। हालांकि, कर्मचारी को भविष्य के सभी ट्रांसफर से स्थायी छूट नहीं दी जा सकती; उसका मामला विशेष नीति के अनुसार विचार करते हुए ऐसी जगह तैनाती दी जानी चाहिए जहां उसके भाई के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।

    नतीजतन, हाईकोर्ट ने ट्रांसफर आदेश रद्द करते हुए बैंक को याचिकाकर्ता को वर्तमान पोस्टिंग पर जारी रखने का निर्देश दिया।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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