राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 से लंबित अपीलकर्ता की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 से लंबित अपीलकर्ता की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी

    राजस्थान हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, जिसकी अपील 2013 से लंबित है। कोर्ट ने उसे आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी, बशर्ते वह अन्य सभी शर्तों को पूरा करता हो।

    जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को केवल इसलिए चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसकी अपील वर्षों से लंबित है और निकट भविष्य में उस पर सुनवाई होने की संभावना नहीं है।

    याचिकाकर्ता को 2013 में अपहरण और घर में जबरन घुसने (House-Trespass) जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया और सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि, उसकी मुख्य सजा को पहले ही निलंबित किया गया, लेकिन उसने दोषसिद्धि के फैसले पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के सबूतों में विसंगतियां हैं, जिससे दोषसिद्धि के आधार पर ही सवाल उठते हैं।

    याचिकाकर्ता का पक्ष यह था कि अपील 2013 से लंबित है और कोर्ट में मामलों के भारी बोझ को देखते हुए निकट भविष्य में इस अपील पर सुनवाई होने की कोई संभावना नहीं है। यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता आगामी पंचायत चुनाव लड़ना चाहता है, लेकिन दोषसिद्धि के आदेश के कारण वह अयोग्य है।

    तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि दोषसिद्धि पर रोक लगाने की शक्ति एक असाधारण शक्ति है, जिसका इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में ही बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए। ऐसा केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की गई।

    कोर्ट ने कहा,

    "कोर्ट को मामले के मुख्य पहलुओं, दोषसिद्धि के प्रथम दृष्टया (prima facie) आधारों और यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती है तो होने वाले विशिष्ट परिणामों की जांच करनी होती है।"

    कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण चश्मदीद गवाह की गवाही और पीड़िता के बयान के बीच बड़ी विसंगतियों और "गंभीर विरोधाभासों" को रेखांकित किया। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने मुख्य गवाहों में से एक को पेश ही नहीं किया। कोर्ट ने उस फोन कॉल के रिकॉर्ड पर भी गौर किया, जो पीड़िता ने मुख्य आरोपी को की थी, जिसमें उसने आरोपी से आकर उसे ले जाने के लिए कहा था।

    इस पृष्ठभूमि में, अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के मामले में एक गंभीर कमी है, जिससे याचिकाकर्ता के पास अपील में सफल होने और बरी होने का पूरा मौका है। इसके अलावा, अदालत ने चुनाव लड़ने की याचिकाकर्ता की इच्छा पर भी ध्यान दिया और कहा कि केवल अपील लंबित होने के कारण उसे चुनाव लड़ने से वंचित नहीं किया जा सकता।

    तदनुसार, याचिका स्वीकार की गई और दोषसिद्धि पर रोक लगाई गई। साथ ही यह निर्देश दिया गया कि केवल अपील लंबित होने के आधार पर याचिकाकर्ता को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा, बशर्ते वह अन्य सभी शर्तों के अनुसार योग्य हो।

    Case Title : Bhanwar Singh v State of Rajasthan

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