चार्जशीट दाखिल करने से पहले SHO स्वतंत्र विवेक का करें इस्तेमाल, महज 'पोस्ट ऑफिस' नहीं हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

Praveen Mishra

17 July 2026 12:41 PM IST

  • चार्जशीट दाखिल करने से पहले SHO स्वतंत्र विवेक का करें इस्तेमाल, महज पोस्ट ऑफिस नहीं हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) केवल जांच अधिकारी (IO) द्वारा तैयार की गई चार्जशीट अदालत भेजने वाले "पोस्ट ऑफिस" नहीं हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप हुई है।

    जस्टिस अनूप कुमार ढंड की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा SHO के खिलाफ लिए गए संज्ञान को बरकरार रखते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल करना महज औपचारिकता नहीं है। SHO को रिकॉर्ड और साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करना अनिवार्य है।

    मामला क्या था?

    याचिकाकर्ता एक सड़क दुर्घटना में घायल हुआ था, जिसमें उसके पैर में फ्रैक्चर हुआ। उसका आरोप था कि पुलिस ने जानबूझकर गंभीर चोट (Grievous Hurt) की धारा चार्जशीट में शामिल नहीं की, जिससे उसे उचित मुआवजा नहीं मिल सका। इसके बाद उसने संबंधित SHO और जांच अधिकारी के खिलाफ IPC की धारा 166 और 167 के तहत कार्रवाई की मांग की।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी

    अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष सुनवाई अनुच्छेद 20 और 21 के तहत संरक्षित अधिकार हैं। SHO यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि जांच केवल IO ने की थी। उनका कर्तव्य है कि वे जांच की निगरानी करें और चार्जशीट दाखिल करने से पहले स्वतंत्र रूप से अपना विवेक लगाएं।

    पीठ ने कहा कि SHO पुलिस व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और वे लापरवाही से जांच या चार्जशीट दाखिल होने की अनुमति नहीं दे सकते।

    आदेश

    हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण अदालत का आदेश रद्द करते हुए SHO के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान को बहाल कर दिया। साथ ही आदेश की प्रति गृह विभाग के सचिव और राजस्थान के DGP को भेजने का निर्देश दिया, ताकि सभी SHO को चार्जशीट दाखिल करते समय स्वतंत्र रूप से रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश जारी किए जा सकें।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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