सरिस्का के 1 किमी दायरे में 'पब्लिक यूटिलिटी' के नाम पर जमीन अधिग्रहण रद्द, राजस्थान HC का फैसला

Praveen Mishra

25 Aug 2026 3:41 PM IST

  • सरिस्का के 1 किमी दायरे में पब्लिक यूटिलिटी के नाम पर जमीन अधिग्रहण रद्द, राजस्थान HC का फैसला

    राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर के शाहपुरा में सरिस्का टाइगर रिजर्व से एक किलोमीटर के भीतर आने वाली जमीन के उस हिस्से का अधिग्रहण रद्द कर दिया, जिसे NHAI ने 'पब्लिक यूटिलिटी एरिया' के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव रखा था।

    जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने कहा कि 'पब्लिक यूटिलिटी' शब्द सभी वैधानिक प्रतिबंधों को खत्म नहीं कर सकता। सार्वजनिक उद्देश्य भूमि अधिग्रहण का आधार हो सकता है, लेकिन इससे वन, वन्यजीव, पर्यावरण और भूमि उपयोग से जुड़े कानूनों के पालन से छूट नहीं मिलती।

    क्या है मामला?

    NH-248A के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए याचिकाकर्ताओं की जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके एक हिस्से में जनता के लिए 'रेस्ट एरिया' बनाने का प्रस्ताव था, जो सरिस्का टाइगर रिजर्व से एक किलोमीटर के भीतर था।

    याचिकाकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताई। जांच के बाद एक रिपोर्ट में प्रस्तावित रेस्ट एरिया को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना व्यवहार्य बताया गया और अधिकारियों ने वैकल्पिक साइट तलाशने पर सहमति भी जताई।

    हालांकि, बाद में उसी स्थान पर प्रोजेक्ट को फिर से शुरू कर दिया गया। अधिकारियों ने इसे 'पब्लिक यूटिलिटी' बताते हुए आगे बढ़ाया, जबकि वन विभाग ने भी प्रतिबंधों को लेकर आपत्ति दोहराई थी।

    HC ने क्या कहा?

    कोर्ट ने कहा कि सरकार के अपने पर्यावरणीय प्रतिबंधों का पालन सभी सरकारी संस्थाओं को करना होगा। संरक्षित वन क्षेत्र के आसपास विकास कार्य पर्यावरण और वन्यजीव संबंधी नियमों की अनदेखी करके नहीं किए जा सकते।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 3C के तहत आपत्तियों को केवल औपचारिक रूप से खारिज नहीं किया जा सकता। सक्षम प्राधिकारी को आपत्तियों और सरकारी रिपोर्टों पर विचार कर स्पष्ट कारण देना जरूरी है।

    अंततः हाईकोर्ट ने रेस्ट एरिया के लिए निर्धारित जमीन की सीमा तक अधिग्रहण कार्यवाही रद्द कर दी।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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