RTI से मिली जानकारी पर सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट भारी, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आधिकारिक संचार को प्राथमिकता

Praveen Mishra

14 Aug 2026 12:59 PM IST

  • RTI से मिली जानकारी पर सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट भारी, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आधिकारिक संचार को प्राथमिकता

    राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि जब किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक संचार के विपरीत RTI के तहत प्राप्त जानकारी सामने हो और आधिकारिक संचार को खारिज करने वाला कोई ठोस रिकॉर्ड मौजूद न हो, तो सक्षम प्राधिकारी का संचार अधिक प्रभावी माना जाएगा।

    जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादियों को प्रबोधक पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था।

    180 दिन से अधिक सेवा में ब्रेक का मामला

    मामला पैरा टीचर्स की प्रबोधक पद पर नियुक्ति से जुड़ा था। राज्य के अनुसार, उम्मीदवारों की नियुक्ति इसलिए नहीं की गई क्योंकि पिछले पांच वर्षों में उनकी सेवा में 180 दिनों से अधिक का ब्रेक था।

    उम्मीदवारों ने नियुक्ति से इनकार को चुनौती देते हुए समानता (Parity) का तर्क दिया। उनका कहना था कि कुछ अन्य समान परिस्थितियों वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई है।

    उन्होंने RTI से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि राजा बाई सोलंकी नामक एक व्यक्ति ने करीब 721 दिन की छुट्टियां ली थीं, फिर भी उसे प्रबोधक पद पर नियुक्ति दी गई।

    RTI जानकारी के विपरीत था सक्षम प्राधिकारी का रिकॉर्ड

    राज्य ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित कर्मचारी ने केवल 149 दिन की छुट्टी ली थी और राजस्थान पंचायती राज प्रबोधक सेवा नियम, 2008 के तहत वह नियुक्ति के लिए पात्र थी।

    राज्य ने इस संबंध में ज्वाइंट डायरेक्टर, प्रारंभिक शिक्षा द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र भी रिकॉर्ड पर रखा।

    हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों का पूरा दावा समानता के आधार पर था, लेकिन RTI के आधार पर 721 दिन की छुट्टी का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी पत्र RTI के तहत दी गई सूचना पर प्राथमिकता रखेगा, खासकर तब जब उस आधिकारिक संचार में दर्ज तथ्यों को खारिज करने वाला कोई ठोस रिकॉर्ड मौजूद न हो।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रतिवादी अपने दावे के समर्थन में अन्य समान मामलों के नियुक्ति आदेश या कोई अन्य ठोस उदाहरण पेश करने में विफल रहे।

    इसके बाद हाईकोर्ट ने सिंगल जज का आदेश रद्द करते हुए कहा कि प्रतिवादी प्रबोधक पद पर नियुक्ति के हकदार नहीं हैं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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