आत्मरक्षा में इस्तेमाल बल का आकलन घटना के समय की परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट
Praveen Mishra
16 Oct 2026 12:35 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि आत्मरक्षा में जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने का आकलन किसी शांत और बाद के विश्लेषण के आधार पर नहीं, बल्कि उस समय व्यक्ति को दिखाई दे रहे तत्काल खतरे की परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को हमलावर से गंभीर चोट या जान जाने का खतरा महसूस हो रहा था, तो उस भय और आशंका को आत्मरक्षा के दावे पर विचार करते समय प्रासंगिक माना जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आत्मरक्षा की दलील का परीक्षण अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाकर नहीं किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने ये टिप्पणियां हत्या के मामले में दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान सजा निलंबित करने की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कीं। आरोपी की ओर से आत्मरक्षा के अधिकार का हवाला दिया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि अचानक हुए हमले के दौरान जान का खतरा महसूस कर रहे व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह हमले को रोकने के लिए आवश्यक बल की सटीक मात्रा का आकलन कर सके। हालांकि, आत्मरक्षा में इस्तेमाल बल उचित था या नहीं, इसका विस्तृत परीक्षण अपील के अंतिम निपटारे के समय किया जाएगा।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने सजा निलंबित करने की अर्जी स्वीकार कर ली और अपील के अंतिम निपटारे तक सजा निलंबित कर दी।

