₹2.25 करोड़ के सिक्योरिटी बॉन्ड की शर्त रद्द, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- कारण बताना जरूरी

Praveen Mishra

14 Aug 2026 12:42 PM IST

  • ₹2.25 करोड़ के सिक्योरिटी बॉन्ड की शर्त रद्द, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- कारण बताना जरूरी

    राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 375 के तहत सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी करते समय सुरक्षा बांड की शर्त लगाने से पहले जिला जज को उसके पीछे का कम से कम कुछ औचित्य या कारण रिकॉर्ड करना जरूरी है।

    जस्टिस सुदेश बंसल की पीठ ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं से सक्सेशन सर्टिफिकेट के लिए ₹2.25 करोड़ का सिक्योरिटी बॉन्ड मांगा गया था।

    मामला याचिकाकर्ताओं के पिता की मृत्यु के बाद उनके नाम पर मौजूद कुछ शेयरों की राशि प्राप्त करने से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने धारा 372 के तहत सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगा था। ट्रायल कोर्ट ने प्रमाणपत्र जारी करते समय ₹2.25 करोड़ के सिक्योरिटी बॉन्ड और कमिटमेंट बॉन्ड की शर्त लगा दी।

    याचिकाकर्ताओं ने इसे कठोर, अनुचित और मनमाना बताते हुए चुनौती दी। उन्होंने कहा कि धारा 375 के तहत सुरक्षा बांड मांगना विवेकाधीन शक्ति है और इसे बिना कारण नियमित रूप से नहीं लगाया जा सकता।

    हाईकोर्ट ने कहा कि जिला जज द्वारा इस शर्त को लगाने के पीछे कोई कारण दर्ज नहीं किया गया, इसलिए ₹2.25 करोड़ का सिक्योरिटी बॉन्ड लगाना onerous और unwarranted था।

    हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ₹2.25 करोड़ का इंडेम्निटी बॉन्ड जमा करने का निर्देश देते हुए सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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