बिना उचित कारण लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक का आदेश बरकरार रखा
Amir Ahmad
22 Oct 2026 12:17 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि शारीरिक अक्षमता या किसी वैध कारण के बिना पत्नी का लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता है और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) के तहत तलाक देने का वैध आधार बन सकता है।
जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने पति को दिए गए तलाक का आदेश बरकरार रखा। अदालत ने माना कि पत्नी की ओर से लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना और आत्महत्या करने की धमकी देना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।
हाईकोर्ट ने तलाक के आदेश के खिलाफ पत्नी की अपील खारिज की। साथ ही, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए दायर उसकी याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली अपील भी खारिज की।
मामले के अनुसार, अपीलकर्ता महिला की शादी 2018 में प्रतिवादी पुरुष से हुई। इसके बाद पति ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की याचिका दायर की, जिसे मंजूर कर लिया गया। दूसरी ओर, पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी, जिसे भी खारिज कर दिया गया। इसके बाद पत्नी ने दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
पति का आरोप था कि शादी के बाद पत्नी, जो नगर निगम में जूनियर अकाउंटेंट के पद पर तैनात थी, नौकरी के सिलसिले में जैसलमेर चली गई। जब पति उसके साथ रहने के लिए जैसलमेर पहुंचा तो पत्नी ने उसके साथ रूखा व्यवहार किया, शारीरिक संबंध बनाने की अनुमति नहीं दी और साथ रहने से इनकार कर दिया। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी जहर खाकर आत्महत्या करने की धमकी देती थी।
पति के अनुसार, पत्नी के इस व्यवहार के बाद वह अपने घर लौट आया और अक्टूबर 2018 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। इस दौरान उनके बीच कोई शारीरिक संबंध भी नहीं बने।
इसके विपरीत, पत्नी ने दलील दी कि जब पति जैसलमेर आया तो उसका व्यवहार उसके प्रति क्रूर था और वह छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करता था। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति उसकी तनख्वाह से पैसे मांगता था और उससे पैसे लेता था। उसका कहना था कि पति न तो जैसलमेर आकर उसके साथ रहा और न ही उसे अपने घर आने दिया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के समर घोष बनाम जया घोष और सोनल तलपदा बनाम वीरभान सिंह समेत कई फैसलों का हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता पत्नी ने शारीरिक अक्षमता या किसी वैध कारण के बिना काफी लंबे समय तक एकतरफा रूप से शारीरिक संबंध बनाने से इनकार किया। यह व्यवहार मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि 25 अक्टूबर 2018 से शारीरिक संबंधों का अभाव और पत्नी द्वारा शारीरिक संबंध स्थापित करने की अनुमति नहीं देना मानसिक क्रूरता है। इसी तरह आत्महत्या करने की धमकी देना भी मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत मानसिक क्रूरता तलाक का वैध आधार है। इसी आधार पर अदालत ने तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी की अपील खारिज की।
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि जब तलाक के आदेश के खिलाफ अपील खारिज की गई तो वैवाहिक अधिकारों की बहाली से संबंधित याचिका खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ दायर अपील भी खारिज किए जाने योग्य है।

