POCSO आरोपी को सशर्त जमानत: राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर लगाया एक साल का बैन
Shahadat
30 May 2026 7:56 PM IST

POCSO आरोपी को ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अनोखी शर्त रखी है, जिसके तहत आरोपी 1 (एक) साल तक किसी भी तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। यह शर्त पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने यह टिप्पणी की कि अगर इस दौरान आरोपी अपने असली नाम या किसी भी काल्पनिक नाम से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए पाया जाता है तो उसकी ज़मानत रद्द कर दी जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि नाबालिग पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर आरोपी-आवेदक पर BNS और POCSO के तहत आरोप लगाए गए। आरोप था कि आवेदक यौन इरादे से पीड़िता को परेशान कर रहा था और उसकी साइबर-स्टॉकिंग कर रहा था।
इस मामले में आरोपी फरवरी 2026 से हिरासत में था और उसने ज़मानत के लिए यह अर्जी दाखिल की थी। आरोपी की ओर से यह दलील दी गई कि शिकायतकर्ता के मौखिक बयान के अलावा, उसके खिलाफ कोई और सबूत पेश नहीं किया गया, और चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
इसके विपरीत, सरकारी वकील ने यह तर्क दिया कि आरोपी द्वारा की गई प्रताड़ना और स्टॉकिंग के कारण पीड़िता को अपने रोज़मर्रा के माहौल में रहने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि आवेदक के व्यवहार ने मनोवैज्ञानिक रूप से उसकी जान को खतरे में डाल दिया।
दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने यह राय व्यक्त की कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए पीड़िता की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए आरोपी को ज़मानत देते समय उस पर कुछ उचित शर्तें लगाना ज़रूरी है।
इसी क्रम में ज़मानत की अन्य शर्तों के अलावा, कोर्ट ने आरोपी को यह निर्देश दिया कि वह पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी तरह का संपर्क न करे, और न ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित किसी भी माध्यम से उससे संपर्क करने की कोशिश करे।
इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा,
"आवेदक को Instagram, Facebook, Snap Chat, Thread, Share Chat आदि जैसे सभी प्रकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से एक साल की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया जाता है। यदि यह पाया जाता है कि वह इस एक साल की अवधि के दौरान किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने नाम से या किसी काल्पनिक नाम से अपने मोबाइल/ई-मेल ID का उपयोग करके या किसी काल्पनिक ई-मेल ID का उपयोग करके कर रहा है, तो उसकी ज़मानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी।"
तदनुसार, ज़मानत की इस अर्जी का निपटारा किया गया।
Title: R v State of Rajasthan

