राजस्थान हाईकोर्ट ने लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी को दोषी की बेटी के इलाज का इंतज़ाम करने का निर्देश दिया, बार-बार पैरोल देने से किया इनकार
Shahadat
24 April 2026 10:41 AM IST

AIIMS में अपनी बेटी के इलाज के लिए दोषी की इमरजेंसी पैरोल की अर्ज़ी खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, सिरोही को निर्देश दिया कि वह सिरोही या किसी उचित सेंटर पर उसकी बेटी के इलाज के लिए सही इंतज़ाम करे।
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने पाया कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता की बेटी मानसिक बीमारी से पीड़ित है, उसे नियमित इलाज की ज़रूरत होगी। हालाँकि, याचिकाकर्ता को नियमित अंतराल पर इमरजेंसी पैरोल देने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके परिवार में कोई भी ऐसा सदस्य नहीं है, जो उसकी बेटी का इलाज AIIMS, जोधपुर में करवा सके। इसलिए, उसने इमरजेंसी पैरोल के लिए अर्ज़ी दी थी।
राज्य सरकार ने इस बात का विरोध किया कि बेटी की बीमारी ऐसी है, जिसके लिए नियमित इलाज की ज़रूरत है। हर बार इस मकसद के लिए याचिकाकर्ता को इमरजेंसी पैरोल नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील से सहमति जताई और कहा,
“परिवार में कोई भी पुरुष सदस्य नहीं है, जो याचिकाकर्ता की बेटी के इलाज की देखभाल कर सके। साथ ही दोषी-याचिकाकर्ता को हर दूसरे महीने या नियमित अंतराल पर इमरजेंसी पैरोल के लिए अर्ज़ी देने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। इसलिए इस कोर्ट की राय में दोषी-याचिकाकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी की मदद ले।”
इस आधार पर DLSA, सिरोही को निर्देश दिया गया कि वह बेटी के इलाज के लिए सिरोही या किसी उचित सेंटर पर सही इंतज़ाम करे। इस संबंध में कोर्ट ने आगे कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी, तो RLSA या DLSA, जोधपुर द्वारा ज़रूरी मदद दी जाएगी।
तदनुसार, याचिका का निपटारा किया गया।
Title: Jagdish v State of Rajasthan & Ors.

