राजस्थान हाईकोर्ट ने CLAT कैंडिडेट की रिज़र्वेशन कैटेगरी बदलने की याचिका खारिज की
Shahadat
16 Sept 2026 12:02 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने CLAT-कंसोर्टियम द्वारा पहली प्रोविज़नल लिस्ट जारी होने के बाद CLAT-2026 की एक कैंडिडेट की याचिका खारिज कर दी। कैंडिडेट अपनी रिज़र्वेशन कैटेगरी को 'अनरिज़र्व्ड जनरल-महिला' से बदलकर 'जनरल-राजस्थान डोमिसाइल' (राजस्थान का मूल निवासी) करवाना चाहती थी।
जस्टिस मनीष शर्मा की बेंच ने कहा कि कट-ऑफ तारीख खत्म होने के बाद एप्लीकेशन फ़ॉर्म में देर से सुधार या बदलाव करना, खासकर रिज़र्वेशन कैटेगरी बदलना, एडमिशन प्रोसेस की पवित्रता को खत्म कर देगा, इसलिए इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कैंडिडेट की अनजाने में हुई गलती को कोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करके ठीक नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब ऐसा करने से सभी कैंडिडेट्स पर समान रूप से लागू होने वाली समय-सीमा का उल्लंघन हो।
बता दें, याचिकाकर्ता CLAT-2026 परीक्षा में शामिल हुई और एप्लीकेशन फ़ॉर्म भरते समय उसने डोमिसाइल रिज़र्वेशन का दावा किए बिना 'अनरिज़र्व्ड जनरल-महिला' कैटेगरी चुनी थी। ऑल इंडिया रैंक घोषित होने के बाद वह पहली काउंसलिंग प्रोसेस में शामिल हुई, जिसके बाद प्रोविज़नल लिस्ट जारी की गई।
इस प्रोविज़नल लिस्ट के जारी होने के बाद याचिकाकर्ता को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने संबंधित अधिकारियों को ईमेल करके डोमिसाइल रिज़र्वेशन कैटेगरी के तहत विचार करने का अनुरोध किया। उसने एप्लीकेशन फ़ॉर्म भरते समय अनजाने में हुई गलती या तकनीकी खराबी के कारण यह कैटेगरी नहीं चुनी थी।
कंसोर्टियम ने इस अनुरोध को खारिज किया, क्योंकि फ़ॉर्म में सुधार की समय-सीमा खत्म हो चुकी थी। इसके खिलाफ यह याचिका दायर की गई।
प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का अनुरोध एक ऐसी पॉलिसी के आधार पर खारिज किया गया, जो सभी कैंडिडेट्स पर समान रूप से लागू होती है। रिज़र्वेशन कैटेगरी में ऐसा बदलाव, रिज़ल्ट घोषित होने के बाद देर से नहीं किया जा सकता।
तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 'जे एंड के पब्लिक सर्विस कमीशन बनाम इसरार अहमद' मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया,
“प्रतियोगी चयन प्रक्रिया में कैंडिडेट का स्टेटस पूरी प्रक्रिया के दौरान एक जैसा रहना चाहिए; एक बार जब कोई कैंडिडेट शुरुआत में किसी खास कैटेगरी को चुन लेता है तो वह चुनाव उसे बाद के हर चरण में बांधे रखता है। बीच में कैटेगरी बदलने की इजाज़त देने से सभी कैंडिडेट्स के साथ समान व्यवहार के सिद्धांत को नुकसान पहुंचेगा।”
इसके अलावा, राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर और अन्य बनाम नीतू हर्ष मामले का भी हवाला दिया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जो उम्मीदवार शुरुआती चरण में आरक्षण का दावा करने में नाकाम रहा, ज़रूरी सर्टिफिकेट नहीं दिया, और जनरल कैटेगरी की फ़ीस भरी, उसे सिलेक्शन के बाद रिज़र्व्ड कैटेगरी का फ़ायदा नहीं दिया जा सकता।
इसी संदर्भ में कोर्ट ने ऊपर बताई गई बात कही और यह भी माना कि एप्लीकेशन में सुधार के लिए तय आखिरी तारीख के लगभग दो महीने बाद किया गया ऐसा सुधार, साफ़ तौर पर बाद में आया एक विचार था और इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती थी।
इसके चलते, याचिका खारिज की गई।
Title: Darshita Gupta v Consortium of National Law Universities and Ors.


