CrPC की धारा 41A के तहत व्हाट्सऐप नोटिस मान्य नहीं, अर्नेश कुमार गाइडलाइन्स के उल्लंघन पर पुलिसकर्मी दोषी: राजस्थान हाईकोर्ट

Praveen Mishra

30 March 2026 11:25 AM IST

  • CrPC की धारा 41A के तहत व्हाट्सऐप नोटिस मान्य नहीं, अर्नेश कुमार गाइडलाइन्स के उल्लंघन पर पुलिसकर्मी दोषी: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में एक पुलिस अधिकारी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। मामला उस गिरफ्तारी से जुड़ा था, जो केवल व्हाट्सऐप के जरिए दी गई सूचना के आधार पर की गई थी, बिना दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41-A के तहत विधिवत नोटिस जारी किए।

    यह आदेश जस्टिस प्रवीर भटनागर की पीठ ने पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा गया संदेश कानूनन मान्य नोटिस की श्रेणी में नहीं आता और इसे वैध सेवा (valid service) नहीं माना जा सकता।

    मामले के तथ्य:

    याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 2021 में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत FIR दर्ज की गई थी। हालांकि, वर्ष 2023 तक उसे कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे व्हाट्सऐप के माध्यम से थाने में उपस्थित होने के लिए सूचित किया।

    याचिकाकर्ता ने इस संदेश का जवाब देते हुए अपनी पत्नी की बीमारी का हवाला देकर उपस्थित होने में असमर्थता जताई। इसके बावजूद पुलिस ने उसके उत्तर पर विचार नहीं किया और दो दिन बाद उसे गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश कर दिया। चार्जशीट में भी गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण दर्ज नहीं थे, जबकि मुख्य आरोपी को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया था।

    कोर्ट की टिप्पणी:

    अदालत ने Arnesh Kumar v State of Bihar तथा Satender Kumar Antil v CBI & Anr. के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 41-A CrPC के तहत नोटिस की सेवा एक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए और व्हाट्सऐप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजी गई सूचना इस आवश्यकता को पूरा नहीं करती।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच अधिकारी को आरोपी अपने घर पर नहीं मिलता, तो उसे कानून के अनुसार नोटिस को उसके निवास स्थान या किसी प्रमुख स्थान पर चस्पा करना चाहिए था।

    अदालत ने पाया कि संबंधित पुलिस अधिकारी का आचरण कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से स्पष्ट विचलन है, जो व्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार पर आघात करता है।

    निष्कर्ष:

    हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी को अवमानना का दोषी ठहराते हुए मामले को सजा निर्धारण (sentencing) के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

    यह फैसला स्पष्ट करता है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन आवश्यक है और व्हाट्सऐप नोटिस को वैध कानूनी नोटिस का विकल्प नहीं माना जा सकता।

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