राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में अपील दायर करने में राज्य की 130 दिन की देरी को माफ़ किया, कहा- फ़ाइल प्रोसेसिंग और मंज़ूरी मिलने में देरी हो सकती है

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में अपील दायर करने में राज्य की 130 दिन की देरी को माफ़ किया, कहा- फ़ाइल प्रोसेसिंग और मंज़ूरी मिलने में देरी हो सकती है

    राजस्थान हाईकोर्ट ने 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के तहत एक मामले में बरी होने के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगने वाली राज्य सरकार की अर्ज़ी में हुई 130 दिन की देरी माफ़ की।

    जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि देरी के कारणों की जांच करते समय व्यावहारिक और न्याय-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना ज़रूरी है, खासकर तब जब मामला भ्रष्टाचार के एक केस में किसी व्यक्ति के बरी होने से जुड़ा हो।

    कोर्ट ने कहा कि एक आम वादी (Litigant) के विपरीत राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया के ज़रिए काम करती है, जिसमें निर्णय लेना, फ़ाइलों का आगे बढ़ना और मंज़ूरी लेना शामिल होता है। कोर्ट ने कहा कि इन चरणों की वजह से अंतिम निर्णय लेने और कानूनी कार्यवाही शुरू करने में देरी हो सकती है।

    कोर्ट ने कहा,

    "निर्णय लेने की प्रक्रिया, फ़ाइलों की प्रोसेसिंग और ज़रूरी मंज़ूरी लेने में मामले का एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास और एक प्रशासनिक स्तर से दूसरे प्रशासनिक स्तर तक जाना स्वाभाविक है। सरकारी कामकाज में शामिल इन प्रक्रियागत ज़रूरतों के कारण अंतिम निर्णय लेने और कोर्ट में कार्यवाही शुरू करने में कुछ देरी हो सकती है।"

    कोर्ट ने आगे कहा कि राज्य सरकार किसी निजी या व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए मुक़दमा नहीं लड़ती, बल्कि अपने सार्वजनिक कर्तव्यों और संस्थागत ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए ऐसा करती है।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपील करने की अनुमति (Leave to Appeal) मिलना कोई स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं है, बल्कि यह अपील कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है। इस चरण में, कोर्ट को मामले के गुण-दोषों की विस्तृत जांच करने की ज़रूरत नहीं होती; उसे केवल यह देखना होता है कि क्या प्रस्तावित अपील में ऐसे मुद्दे या महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं, जिन पर अपील कोर्ट द्वारा विचार किया जाना ज़रूरी है।

    ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को देखने के बाद हाईकोर्ट को राज्य सरकार को अपील करने की अनुमति देने के लिए उचित आधार मिले। कोर्ट ने माना कि यह चुनौती न तो तुच्छ थी और न ही परेशान करने के इरादे से दी गई थी।

    इसके अनुसार, कोर्ट ने 130 दिन की देरी माफ़ की और अपील करने की अनुमति मांगने वाली अर्ज़ी मंज़ूर की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस अर्ज़ी को एक अपील के रूप में माना जाए और उसी तरह रजिस्टर किया जाए। कोर्ट ने कहा कि जब अपील स्वीकार करने (Admission) पर विचार किया जाएगा, तब प्रतिवादियों (Respondents) को भी अपनी बात रखने का मौक़ा दिया जाएगा।

    Case Title : State of Rajasthan v Bheemrao Pinjare

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