आपराधिक मामलों की तेज़ी से जांच करने का मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अच्छी सुविधाओं वाली जांच लैब बनाने पर विचार करने को कहा

Shahadat

29 May 2026 10:44 AM IST

  • आपराधिक मामलों की तेज़ी से जांच करने का मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अच्छी सुविधाओं वाली जांच लैब बनाने पर विचार करने को कहा

    राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि आज के तेज़ रफ़्तार ज़माने में, जहां अपराधी अपराध करने के लिए नए और आधुनिक तरीके अपना रहे हैं, पुलिस की जांच व्यवस्था को आधुनिक और अच्छी सुविधाओं वाली जांच लैब से मज़बूत बनाना ज़रूरी है, जिनमें पर्याप्त वैज्ञानिक सुविधाएं हों।

    जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने राजस्थान में ऐसी लैब की कमी और इसके चलते राज्य पुलिस का दूसरे राज्यों में मौजूद लैब से मिलने वाली रिपोर्ट और विश्लेषण पर निर्भर रहने की बात पर ज़ोर दिया। बेंच ने कहा कि इससे बेवजह देरी होती है, जिससे निष्पक्ष जाँच और त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन होता है।

    आगे कहा गया,

    “राजस्थान राज्य में जल्द से जल्द आधुनिक जांच लैब बनाई जानी चाहिए, जिनमें पर्याप्त बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारी हों, ताकि जांच तेज़ी से हो सके और जल्द-से-जल्द अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके। निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना राज्य का संवैधानिक दायित्व है, क्योंकि जांच के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी के कारण होने वाली देरी, निष्पक्ष जांच और त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करती है... इस आदेश की एक प्रति मुख्य सचिव; अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग, राजस्थान सरकार और पुलिस महानिदेशक को भेजी जाए, ताकि वे इस मामले के सभी पहलुओं पर विचार करके, आम जनता के हित में राजस्थान राज्य में जांच के लिए उचित और अच्छी सुविधाओं वाली लैब विकसित और स्थापित कर सकें।”

    कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पहले दिए गए आदेश में यह निर्देश दिया गया कि पुलिस बल को दो हिस्सों में बाँटा जाए - एक जाँच के लिए और दूसरा क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए।

    इस संबंध में, ADG (क़ानून-व्यवस्था) ने एक समिति के गठन और उस समिति द्वारा दी गई सिफ़ारिशों की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखा, जिसका शीर्षक था “पुलिस थाना स्तर पर जाँच और क़ानून-व्यवस्था के कार्यों को अलग करने का प्रस्ताव”।

    उस रिपोर्ट और समिति की सिफ़ारिशों को रिकॉर्ड पर लेने के बाद कोर्ट ने ऊपर बताई गई टिप्पणियां कीं। आगे कहा कि अपराध दर में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए, राज्य में मौजूदा फ़ॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) पर्याप्त नहीं है।

    कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि जांच करने वालों/कर्मचारियों को मज़बूत किया जाए और उनकी संख्या बढ़ाई जाए ताकि FSL की रिपोर्ट जल्द से जल्द मिल सकें और जांच की अंतिम रिपोर्ट तेज़ी से जमा की जा सके।

    आगे कहा गया,

    “राज्य का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए, क्योंकि जांच के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे की कमी के कारण होने वाली देरी, निष्पक्ष जाँच और त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करती है।”

    तदनुसार, आदेश की कॉपी संबंधित अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया गया ताकि वे इस मामले पर गौर करें और व्यापक जनहित में राजस्थान राज्य में जांच के लिए उपयुक्त और सुसज्जित प्रयोगशालाएं विकसित करें।

    Title: Prem Prakash Bidyasar v State of Rajasthan, and other connected matter

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