गरीबी के कारण जेल नहीं भेजा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को रिहा किया
Amir Ahmad
31 March 2026 12:51 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल आर्थिक असमर्थता के कारण किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी नहीं जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि गरीबी को जेल भेजने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
जस्टिस फरजंद अली ने यह टिप्पणी करते हुए उस आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया, जिसे केवल इसलिए जेल में रखा गया, क्योंकि वह अदालत द्वारा लगाए गए खर्च (कॉस्ट) का भुगतान नहीं कर सका था जबकि पक्षकारों के बीच विवाद पहले ही सुलझ चुका था।
मामला चेक बाउंस से जुड़ा था, जिसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया। बाद में जब मामला उच्च अदालत में लंबित था तब दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया। अदालत ने समझौते को स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया लेकिन आरोपी पर चेक राशि का 15 प्रतिशत खर्च के रूप में जमा करने की शर्त लगाई।
आर्थिक तंगी के कारण आरोपी यह राशि जमा नहीं कर सका, जिसके चलते उसे दोबारा हिरासत में ले लिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की लागत (कॉस्ट) केवल प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए होती है न कि सजा के रूप में। इसे इस तरह लागू नहीं किया जा सकता कि किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आंच आए।
अदालत ने कहा,
“चेक बाउंस का अपराध मूलतः क्षतिपूर्ति से जुड़ा है। जब शिकायतकर्ता संतुष्ट है और विवाद समाप्त हो चुका है तो केवल लागत न देने के आधार पर किसी को जेल में रखना असंगत और अनुचित है।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून व्यक्ति की स्वतंत्रता को उसकी भुगतान क्षमता पर निर्भर नहीं बना सकता।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की रिहाई का आदेश दिया और लागत जमा करने की शर्त को समाप्त कर दिया।

