समय से पहले दायर चेक बाउंस शिकायत वापस लेने के बाद नई शिकायत वैध, कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

Amir Ahmad

17 Jun 2026 12:34 PM IST

  • समय से पहले दायर चेक बाउंस शिकायत वापस लेने के बाद नई शिकायत वैध, कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

    राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चेक बाउंस मामले में पहले दायर की गई शिकायत समय से पूर्व होने के कारण वापस ले ली गई हो तो उसके बाद दायर की गई नई शिकायत को केवल इस आधार पर समय-सीमा से बाहर नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर एक आरोपी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।

    जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने कहा कि समय से पहले दायर शिकायत वापस लेने के बाद प्रस्तुत की गई नई शिकायत को विलंबित नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमे के अंतिम चरण में, जब दोनों पक्षों के साक्ष्य दर्ज हो चुके हों, तब इस प्रकार की आपत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती।

    मामले के अनुसार चेक अनादरण के बाद परिवादी ने 16 मई 2016 को शिकायत दायर की थी। बाद में यह शिकायत समय से पूर्व दायर पाई गई, जिसके चलते उसे वापस ले लिया गया। इसके बाद 30 मई 2016 को नई शिकायत दायर की गई, जिस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू कर दी गई।

    कार्यवाही लगभग अंतिम चरण में पहुंचने के बाद आरोपी ने वर्ष 2024 में हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसका तर्क था कि दूसरी शिकायत समय-सीमा के भीतर नहीं थी और विलंब माफी के लिए कोई पृथक आवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए पूरी कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए।

    परिवादी की ओर से इस दलील का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी वर्षों तक मुकदमे में भाग लेता रहा और अब अंतिम चरण में पहुंचकर कार्यवाही को लंबा करने का प्रयास कर रहा है।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पहली शिकायत केवल समय से पूर्व दायर होने के कारण वापस ली गई हो, तो उसके बाद दायर शिकायत को समय-सीमा से बाहर नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने यह भी कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 142 के प्रावधानों के अनुसार पर्याप्त कारण बताए जाने पर विलंब से शिकायत दायर की जा सकती है। वर्तमान मामले में दूसरी शिकायत दाखिल करने में हुई देरी के कारणों का उचित स्पष्टीकरण दिया गया।

    अपने आदेश में अदालत ने कहा,

    “विचारण के अंतिम चरण में जब दोनों पक्षों के साक्ष्य दर्ज हो चुके हैं, तब आरोपी द्वारा उठाई गई इस आपत्ति पर विचार नहीं किया जा सकता।”

    इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की और चेक बाउंस मामले की कार्यवाही जारी रखने का मार्ग प्रशस्त किया।

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