कोर्ट स्कूल रिकॉर्ड में जन्म तिथि बदलने के लिए एजुकेशन बोर्ड को निर्देश नहीं दे सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

Shahadat

14 July 2026 10:30 AM IST

  • कोर्ट स्कूल रिकॉर्ड में जन्म तिथि बदलने के लिए एजुकेशन बोर्ड को निर्देश नहीं दे सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट एजुकेशन बोर्ड को स्कूल सर्टिफिकेट में दर्ज जन्म तिथि बदलने का निर्देश नहीं दे सकता; कोर्ट ने माना कि ऐसी रिक्वेस्ट पर सबसे पहले संबंधित बोर्ड को ही विचार करना चाहिए। [2026 LiveLaw (Raj) 278]

    राजस्थान बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन को एक छात्रा की 10वीं क्लास की मार्कशीट में उसकी जन्म तिथि बदलने का निर्देश देने वाले सिंगल जज का आदेश रद्द करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की डिवीज़न बेंच ने साफ़ किया कि अगर कोई व्यक्ति बोर्ड के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह सिविल कोर्ट जा सकता है।

    कोर्ट राजस्थान बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा दायर स्पेशल अपील पर सुनवाई कर रहा था। यह अपील सिंगल जज के उस आदेश के ख़िलाफ़ थी, जिसमें बोर्ड को रेस्पॉन्डेंट (याचिकाकर्ता) की 10वीं क्लास की मार्कशीट में उसकी जन्म तिथि बदलने का निर्देश दिया गया।

    बोर्ड ने तर्क दिया कि ये निर्देश 'जिज्ञा यादव बनाम सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ थे। सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के अनुसार, जन्म तिथि में सुधार के लिए की गई रिक्वेस्ट पर सबसे पहले बोर्ड को ही विचार करना ज़रूरी है।

    इस आपत्ति के बाद रेस्पॉन्डेंट के वकील ने कहा कि उन्हें ज़रूरी सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स जमा करने की इजाज़त दी जाए और बोर्ड को निर्देश दिया जाए कि वह कानून के अनुसार उनकी रिक्वेस्ट की जांच करे।

    बोर्ड की बात मानते हुए डिवीज़न बेंच ने कहा:

    "हम अपीलकर्ता के वकील की बात से सहमत हैं और मानते हैं कि यह कोर्ट जन्म तिथि बदलने के लिए अधिकृत नहीं है। इसलिए सिंगल जज का वह फ़ैसला रद्द किया जाता है, जिसमें जन्म तिथि बदलने का निर्देश दिया गया।"

    हालांकि, कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया कि वह रेस्पॉन्डेंट के डॉक्यूमेंट्स की जांच करे और जन्म तिथि में सुधार की उनकी रिक्वेस्ट पर फ़ैसला ले। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर बोर्ड इस नतीजे पर पहुंचता है कि कोई बदलाव ज़रूरी नहीं है, तो उसे एक तर्कपूर्ण और विस्तृत आदेश (Reasoned and Speaking Order) जारी करना होगा, ताकि रेस्पॉन्डेंट के पास सिविल कोर्ट में उचित कानूनी उपाय अपनाने की आज़ादी रहे।

    Title: Board of Secondary Education, Rajasthan v Annu

    Next Story