उम्मीदवार को पात्रता प्रमाण पत्र पेश न करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जिसे हासिल करना विभाग की ज़िम्मेदारी: राजस्थान हाईकोर्ट

Shahadat

14 May 2026 10:23 AM IST

  • उम्मीदवार को पात्रता प्रमाण पत्र पेश न करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जिसे हासिल करना विभाग की ज़िम्मेदारी: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जहां किसी उम्मीदवार की राष्ट्रीयता से जुड़ा पात्रता प्रमाण पत्र हासिल करने की ज़िम्मेदारी नियुक्त करने वाले सरकारी विभाग की होती है, वहां उम्मीदवार के ख़िलाफ़ इस आधार पर कोई भी प्रतिकूल कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती कि उसने वह प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क नहीं किया।

    जस्टिस नूपुर भाटी की बेंच सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसके ख़िलाफ़ जारी की गई चार्जशीट रद्द करने की मांग की गई। इस चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि वह अपनी राष्ट्रीयता से जुड़ा पात्रता प्रमाण पत्र जमा करने में विफल रही थी।

    बता दें, याचिकाकर्ता राजस्थान की मूल निवासी थी, जिसने केन्या में काम करने वाले एक व्यक्ति से शादी की थी। इसके बाद वह केन्या चली गई, अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी और केन्या की नागरिकता हासिल की।

    आखिरकार, वैवाहिक कलह के चलते याचिकाकर्ता वापस भारत आ गई और भारतीय नागरिकता दिए जाने के लिए आवेदन किया, जिस पर फ़ैसले का इंतज़ार था। इसके समानांतर, उसने सहायक अभियंता (सिविल) के पद के लिए आवेदन किया, और उसे नियुक्त कर लिया गया।

    राजस्थान सर्विस ऑफ़ इंजीनियर्स एंड एलाइड पोस्ट (पब्लिक हेल्थ ब्रांच) रूल्स, 1968 के नियम 8 के आधार पर एक केन्याई नागरिक भी इस पद के लिए आवेदन करने का पात्र था।

    इसके बाद संबंधित विभाग ने याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उसकी राष्ट्रीयता से जुड़े पात्रता प्रमाण पत्र को जमा करने की मांग की। तत्पश्चात, चार्जशीट जारी की गई, जिसके साथ ही याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी गई। इसे कोर्ट में चुनौती दी गई।

    तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने 10 मई, 1978 को गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) का ज़िक्र किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि पात्रता प्रमाण पत्र नियुक्त करने वाले विभाग को स्वयं ही हासिल करना होता है। उम्मीदवार के लिए यह ज़रूरी नहीं था कि वह प्रमाण पत्र जारी करवाने के लिए संबंधित विभाग या मंत्रालय से संपर्क करे।

    इसके अलावा, इस बात को भी ध्यान में रखा गया कि याचिकाकर्ता की शैक्षिक योग्यताओं या उस पद के लिए उसकी मूल पात्रता के संबंध में कोई विवाद नहीं था।

    कोर्ट ने आगे यह राय व्यक्त की,

    "...विदेशी देशों से आए उन प्रवासियों के मामले में, जो भारत में स्थायी रूप से बसने का इरादा रखते हैं, राष्ट्रीयता, आयु और संबंधित रियायतों के संबंध में उनकी पात्रता केवल सामान्य नियमों द्वारा ही सख्ती से नियंत्रित नहीं होती, बल्कि उन कार्यकारी निर्देशों द्वारा भी नियंत्रित होती है, जिन्हें राज्य सरकार जारी कर सकती है। ये निर्देश, आवश्यक संशोधनों के साथ मोटे तौर पर भारत संघ द्वारा निर्धारित नीति के अनुरूप होते हैं।"

    इस पृष्ठभूमि में न्यायालय ने यह राय व्यक्त की कि प्रतिवादी विभाग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बाध्यकारी निर्देशों का पालन करने में विफल रहा। उसने याचिकाकर्ता के विरुद्ध अनुचित रूप से अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी थी।

    प्रतिवादियों की कार्रवाई को "अन्यायपूर्ण और अनुचित" करार देते हुए न्यायालय ने याचिका स्वीकार की। प्रतिवादी को 4 सप्ताह के भीतर पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

    Title: Ms. Shubhra Panwar v the State of Rajasthan & Ors.

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