पिछली FIR में नहीं उठाए गए, देर से लगाए गए आरोप प्रक्रिया का दुरुपयोग दर्शाते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
Shahadat
4 May 2026 10:45 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि किसी गंभीर अपराध का उचित समय के भीतर, या उस प्रासंगिक समय पर खुलासा न करना, जब उसी शिकायतकर्ता द्वारा उसी आरोपी के खिलाफ पहले ही अपराध दर्ज किया गया, आरोपों को झूठा साबित कर देगा और बाद की शिकायत/FIR/आरोपों को कानून का दुरुपयोग बना देगा।
याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाने वाली FIR रद्द करते हुए जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने टिप्पणी की कि FIR कथित घटना की तारीख से दो महीने से अधिक की देरी के बाद दर्ज की गई, और वह भी संबंधित परिवार के सदस्यों के बीच पहले से चल रहे संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि में।
उन्होंने कहा,
“विवादित FIR संख्या 127/2021 मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण आरोपों से भरा झूठ का पुलिंदा मात्र है। बदली हुई परिस्थितियों में, जहां जांच अधिकारी द्वारा पहली FIR संख्या 80/2021 में याचिकाकर्ता को दोषी नहीं पाया गया, उपरोक्त बातों पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा जारी रखने की अनुमति देना बेतुका होगा।”
कोर्ट याचिकाकर्ता द्वारा दायर FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने तर्क दिया कि बलात्कार की कथित घटना के दो दिन बाद एक और घटना हुई। यह प्रस्तुत किया गया कि प्रतिवादियों ने दूसरी घटना के संबंध में एक FIR दर्ज की, जिसमें याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार या किसी संबंधित अपराध का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
जब पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में मौजूदा FIR में याचिकाकर्ता की संलिप्तता को नकार दिया तो बलात्कार का मामला कथित घटना की तारीख से 2 महीने से अधिक की देरी के बाद दर्ज किया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उनके परिवारों के बीच पहले से ही संपत्ति का विवाद चल रहा था। इसलिए बलात्कार की FIR किसी गुप्त मकसद से दर्ज की गई।
तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मामले बटलंकी केशव (केसवा) कुमार अनुराग बनाम तेलंगाना राज्य और अन्य का संदर्भ दिया, जिसमें यह माना गया कि उसी शिकायतकर्ता द्वारा पिछली FIR में आरोपों का खुलासा न करना घातक था, और कई महीनों बाद दूसरी FIR में ऐसा खुलासा करना सरासर अतिशयोक्ति थी, जिसे खारिज किया जाना चाहिए।
इस पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना के संबंध में 2 महीने से अधिक की देरी के बाद शिकायत दर्ज करने का कोई कारण नहीं था। अदालत ने यह माना कि FIR दुर्भावनापूर्ण इरादे और किसी छिपे हुए मकसद से दर्ज की गई, और यह झूठ तथा मनगढ़ंत बातों के सिवा कुछ नहीं थी।
यह फैसला दिया गया कि ऐसी FIR के आधार पर मुकदमा चलाने की अनुमति देना बेतुका होगा। तदनुसार, याचिका स्वीकार की गई और याचिकाकर्ता के विरुद्ध दर्ज FIR रद्द की गई।
Title: Kamlesh Kumar v State of Rajasthan & Anr.

