अनुकंपा नियुक्ति में निचला पद स्वीकार करने के बाद उच्च पद का दावा नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
Shahadat
15 Oct 2026 10:22 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के तहत दिए गए किसी निचले पद को स्वीकार कर लेता है तो वह बाद में किसी उच्च पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।
जस्टिस बिपिन गुप्ता की पीठ ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने 2013 में अनुकंपा नियुक्ति के तहत एक पद स्वीकार किया और उस पर 2 साल तक काम भी किया। इसके बाद 2015 में उसने एक उच्च पद पर नियुक्ति की मांग करते हुए यह याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने शुरुआत में 'असिस्टेंट ट्रैफिक इंस्पेक्टर' (सहायक यातायात निरीक्षक) के पद के लिए आवेदन किया। हालांकि, जब उसका आवेदन लंबित था, तब संबंधित नियमों में कुछ संशोधन किए गए, जिसके कारण वह पद अनुकंपा नियुक्ति के लिए उपलब्ध नहीं रहा।
इसलिए उसे 'कंडक्टर' का पद दिया गया, जिसे उसने स्वीकार किया। बाद में संबंधित नियमों में फिर से संशोधन किया गया, जिससे वह पद अनुकंपा नियुक्ति के लिए फिर से उपलब्ध हो गया। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने 2015 में उच्च पद पर नियुक्ति के लिए याचिका दायर की।
तर्क दिया गया कि उसके पिता की मृत्यु के समय जो नियम लागू थे, उन्हीं के अनुसार उसके आवेदन पर विचार किया जाना चाहिए। उन नियमों के तहत वह पद उपलब्ध है, और बाद में किए गए संशोधनों को इस मामले में लागू नहीं किया जाना चाहिए।
इसके विपरीत, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति किसी विशेष पद पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा 'अधिकार' के रूप में नहीं कर सकता, क्योंकि अनुकंपा नियुक्ति भर्ती का कोई वैकल्पिक तरीका नहीं है।
इसके अलावा, यह भी कहा गया कि याचिका 2 साल की देरी से दायर की गई। चूंकि याचिकाकर्ता ने बिना किसी आपत्ति के वह पद स्वीकार कर लिया था, इसलिए वह बाद में किसी उच्च पद पर नियुक्ति की मांग नहीं कर सकता।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति से सरकारी नौकरी पाने का कोई पक्का अधिकार (Vested Right) नहीं मिल जाता। साथ ही किसी कर्मचारी की मृत्यु होने का मतलब यह नहीं है कि उसके आश्रित को उसकी पसंद का पद मिल ही जाए। इसके अलावा, केवल योग्य होना या कोई विशेष शैक्षणिक योग्यता होना ही किसी आश्रित को किसी खास या उच्च पद का अधिकार नहीं देता है।
अदालत ने आगे बताया कि याचिकाकर्ता के पास यह मौका था कि वह नियुक्ति पत्र मिलते ही प्रतिवादी की कार्रवाई को चुनौती दे सकता था, या फिर उच्च पद पर विचार किए जाने का अधिकार सुरक्षित रखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकता था। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं किया गया; बल्कि उस पद को स्वीकार कर लिया गया।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 'डायरेक्टर ऑफ टाउन पंचायत व अन्य बनाम एम. जयबल व अन्य' मामले का हवाला दिया, जिसमें यह तय किया गया,
"एक बार जब कोई व्यक्ति अनुकंपा के आधार पर दिए गए निचले पद को स्वीकार कर लेता है, तो वह बाद में किसी उच्च पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।"
इस संदर्भ में, अदालत ने कहा,
"इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर विचार करने के लिए कौन-सी तारीख प्रासंगिक होगी, यह उस समय लागू नियमों और कानून पर निर्भर करता है, जो मृत्यु की तारीख पर ऐसी नियुक्ति को नियंत्रित करते हैं। हालांकि, इस मामले में याचिकाकर्ता ने बिना किसी आपत्ति के दिए गए निचले पद को स्वीकार कर लिया और लगभग दो वर्षों तक उस पर काम भी किया, इसलिए अब वह किसी उच्च पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।"
तदनुसार, याचिका खारिज की गई।
Case Title : Avinash Bhatnagar v the Rajasthan State Road Transport Corporation & Ors

