27 साल पुराना यथास्थिति आदेश अभी भी बाध्यकारी: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को अवमानना का दोषी ठहराया

  • 27 साल पुराना यथास्थिति आदेश अभी भी बाध्यकारी: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को अवमानना का दोषी ठहराया

    राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि 1999 से अपील की लंबितता, और उत्तरदाताओं का दावा है कि वे लंबे समय तक लंबित रहने के कारण वकीलों के साथ नियमित संपर्क में नहीं रह सकते, एक संपत्ति पर निर्माण करने के लिए स्वीकार्य औचित्य नहीं था, जिसके संबंध में यथास्थिति बनाए रखने की मौजूदा दिशा थी।

    आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने के लिए प्रतिवादियों को अदालत की अवमानना ​​का दोषी ठहराते हुए जस्टिस संदीप शाह की पीठ ने कहा कि अपील की प्रगति के बावजूद, पक्ष अंतरिम आदेश का पालन करने के लिए बाध्य थे।

    संदर्भ के लिए, न्यायालय एक अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि 1999 में न्यायालय ने संबंधित संपत्ति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। इस बात पर प्रकाश डाला गया कि अंतरिम निर्देश अभी भी लागू था, लेकिन उत्तरदाताओं ने भूखंड पर निर्माण कर लिया था, जिससे अदालत के निर्देशों का उल्लंघन हुआ।

    इसके विपरीत, उत्तरदाताओं द्वारा यह तर्क दिया गया कि साइट पर एक कमरा पहले से ही मौजूद था, और समय बीतने के कारण यह जीर्ण-शीर्ण स्थिति में था, जिसके लिए अंतरिम आदेश का उल्लंघन करने के किसी भी इरादे के बिना, केवल मरम्मत कार्य ईमानदारी से किया गया।

    इसके अलावा, यह प्रस्तुत किया गया कि चूंकि 2020 से पहले मामले में कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई, इसलिए उत्तरदाता वकील के साथ नियमित संपर्क में नहीं रह सके। प्रार्थना की गई कि कथित उल्लंघन को नरमी से देखा जाए।

    विवाद को सुनने के बाद न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उत्तरदाताओं द्वारा ऐसे किसी भी निर्माण या नवीनीकरण के लिए अदालत की अनुमति मांगने के लिए कोई अंतरिम आवेदन दायर नहीं किया गया।

    आगे कहा गया,

    "यह दलील कि दूसरी अपील में प्रभावी कार्यवाही के अभाव के कारण उत्तरदाता अपने वकील के साथ नियमित संपर्क में नहीं रह सके, को इस न्यायालय के आदेश की अवहेलना के औचित्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है, जो अभी भी प्रभावी है। अंतरिम आदेश का पालन करने का दायित्व अपील की प्रगति के बावजूद पार्टियों पर बाध्यकारी था।"

    तदनुसार, उत्तरदाताओं को अदालत की अवमानना ​​का दोषी ठहराया गया।

    Case Title : Devendra & Ors. v Lrs. Of Magni & Ors

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