ART Act की आयु सीमा पार करने के बाद महिला IVF प्रक्रिया जारी नहीं रख सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
Shahadat
8 Nov 2026 6:57 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जो महिला 50 वर्ष की आयु पार कर चुकी है - जो कि 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021' (ART Act) की धारा 21(g) के तहत निर्धारित अधिकतम आयु सीमा है - वह भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer) नहीं करवा सकती। यह रोक तब भी लागू होती है, जब भ्रूण कानूनी रूप से बनाए गए हों और महिला के आयु सीमा के भीतर रहने के दौरान ही उन्हें फ्रीज (Cryopreserved) कर दिया गया हो।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने इस दलील को खारिज किया कि भ्रूणों को फ्रीज करने से दंपति को इलाज पूरा करने का पक्का अधिकार (Vested Right) मिल जाता है।
कोर्ट ने कहा:
"इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं के वकील की यह दलील भी स्वीकार नहीं की जा सकती कि भ्रूण फ्रीज होने से उन्हें ART सेवाओं का लाभ उठाने का पक्का अधिकार मिल गया। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ART Act की धारा 21(g) के तहत अनिवार्य शर्त यह है कि क्लिनिक ART सेवाएं केवल उन्हीं महिला और पुरुष को दे सकता है, जिनकी आयु क्रमशः 50 वर्ष और 55 वर्ष से कम हो। इसलिए, जिस दिन ये सेवाएं ली जा रही हों या संबंधित प्रक्रिया की जा रही हो, उस दिन निर्धारित आयु सीमा का पालन होना चाहिए।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"इस प्रक्रिया के दो चरण होते हैं, और हर चरण के लिए आयु सीमा का पालन होना चाहिए। केवल इसलिए कि महिला के अधिकतम आयु सीमा पार करने से पहले भ्रूण फ्रीज कर दिए गए, उसे प्रक्रिया के अगले चरण - यानी भ्रूण या गैमीट (उamete) को महिला के प्रजनन तंत्र में स्थानांतरित करने - की अनुमति नहीं दी जा सकती, यदि वह निर्धारित आयु सीमा पार कर चुकी है। ऐसा करना एक्ट के नियमों का उल्लंघन होगा।"
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयु सीमाएं पति और पत्नी दोनों पर अलग-अलग लागू होती हैं, न कि पूरे दंपति पर एक इकाई के रूप में। हालांकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि महिला को ART सेवाओं का लाभ उठाने का स्वतंत्र अधिकार है, भले ही उसके पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक हो।
कोर्ट छह याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इनमें से हर मामले में, या तो पति या पत्नी ने धारा 21(g) के तहत निर्धारित अधिकतम आयु सीमा पार कर ली थी। ये तथ्य मुख्य याचिका से लिए गए, जिसे एक प्राइमरी स्कूल शिक्षिका और उनके पति (जो एक किसान हैं) ने दायर किया। यह दंपति ART/IVF के जरिए बच्चा पाने के लिए एक क्लिनिक के पास गया। 22 नवंबर 2023 को, क्लिनिक में नौ भ्रूण (Embryos) “कानूनी रूप से बनाए गए और क्रायोप्रिजर्व (ठंडी अवस्था में सुरक्षित) किए गए”।
आगे कहा गया,
“उस समय दोनों याचिकाकर्ता 47 वर्ष के थे, जो ART Act की धारा 21(g) के तहत तय की गई अधिकतम आयु सीमा (महिला के लिए 50 वर्ष और पुरुष के लिए 55 वर्ष) के दायरे में आते थे।”
जुलाई 2024 में पहला फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर “असफल रहा”।
फरवरी 2025 में दूसरे ट्रांसफर के कारण “याचिकाकर्ता नंबर 1 गर्भवती हो गईं। दुर्भाग्य से, 5-6 सप्ताह बाद ही गर्भावस्था को समाप्त (Terminate) करना पड़ा।” 10 दिसंबर 2025 को पत्नी की उम्र 50 वर्ष की अधिकतम अनुमत सीमा से अधिक हो गई।
अदालत ने गौर किया,
“हालांकि क्लिनिक में अभी भी चार भ्रूण क्रायोप्रिजर्व हैं... लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि याचिकाकर्ता नंबर 1 की उम्र 10 दिसंबर 2025 को 50 वर्ष की अधिकतम सीमा से अधिक हो गई। ART Act की धारा 21(g) के तहत लगी पाबंदियों के कारण उन्हें यह प्रक्रिया कराने की अनुमति नहीं है। वहीं, उनके पति (याचिकाकर्ता नंबर 2) की उम्र अभी भी तय की गई अधिकतम सीमा से कम है।”
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से निर्देश देने की मांग की कि पत्नी को अपना इलाज पूरा करने और बचे हुए चार भ्रूणों में से एक का ट्रांसफर कराने की अनुमति दी जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि धारा 21(g) के तहत आयु सीमा को “बच्चा चाहने वाले जोड़े (Commissioning Couple) को एक इकाई (Unit) मानकर” समझा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि एक जोड़े (युग्म) के रूप में पति का ART (सहायक प्रजनन तकनीक) के माध्यम से संतान पैदा करने का अधिकार बना रहता है, लेकिन "इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, क्योंकि यह प्रक्रिया केवल उसकी अपनी पत्नी के साथ ही की जा सकती है"।
उन्होंने 'मनजीत कौर बनाम भारत संघ (2025)' मामले में समान पीठ (Coordinate Bench) के फैसले का हवाला दिया, जिसमें एक जोड़े को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई, क्योंकि उनमें से एक व्यक्ति निर्धारित आयु सीमा के भीतर था।
यह तर्क दिया गया कि यह प्रक्रिया नवंबर 2023 में शुरू हुई और यह "एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया" है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को बचे हुए भ्रूणों (Embryos) को भी ट्रांसफर करने की अनुमति मिलनी चाहिए। विशेष रूप से तब, जब "इन भ्रूणों को उस समय क्रायोप्रिजर्व (Cryopreserved) किया गया, जब याचिकाकर्ता संख्या 1 निर्धारित आयु सीमा के भीतर थी।" ऐसा करने से मना करना उस अधिकार का उल्लंघन होगा, "जो तब प्राप्त हो गया था जब 22.11.2023 को कानूनी रूप से भ्रूण बनाए गए और उन्हें क्रायोप्रिजर्व किया गया।"
क्लिनिक ने तथ्यों पर कोई विवाद नहीं जताया; उसने कहा कि "याचिकाकर्ता संख्या 1 अपनी उम्र के हिसाब से अच्छी सेहत में लगती हैं। उन्हें ऐसी कोई बड़ी मेडिकल समस्या नहीं है, जो उन्हें गर्भधारण करने से रोके।" क्लिनिक ने चार में से एक भ्रूण को ट्रांसफर करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई, "बशर्ते इस अदालत से इसके लिए अनुमति मिल जाए, क्योंकि क्लिनिक ART Act के प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य है।"
भारत संघ ने इन याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि आयु सीमाएं 'स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति' की सिफारिशों के अनुरूप हैं।
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 'पंकज कुमार दास बनाम भारत संघ (2025)' मामले में इन आयु सीमाओं की वैधता बरकरार रखी थी।
इस अधिनियम में "एक संयुक्त इकाई के रूप में, संतान चाहने वाले जोड़े (Commissioning Couple) की आयु तय करने वाला कोई प्रावधान नहीं है"। वास्तव में, ART नियम 2022 के नियम 13(f)(iii) के तहत एक महिला ART सेवाओं का लाभ उठा सकती है, भले ही उसके पति की उम्र अधिकतम आयु सीमा से अधिक हो गई हो।
इसमें यह भी बताया गया कि ART उपचार कैसे काम करता है। इसके अनुसार, ART Act के तहत प्रक्रियाएं 'उपचार चक्रों' (Treatment Cycles) में पूरी की जाती हैं। एक उपचार चक्र, मोटे तौर पर इस प्रक्रिया में शामिल महिला के मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) के अनुरूप होता है। यदि किसी जोड़े या पक्ष का एक उपचार चक्र (ट्रीटमेंट साइकिल) पूरा हो जाता है और उससे मनचाहा परिणाम नहीं मिलता है तो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, हर मामले की स्थिति को देखते हुए, इस उपचार चक्र को कई बार दोहराया जा सकता है।
ART उपचार मूल रूप से चक्रों में होता है, जहां हर चक्र में उपचार का एक नया और स्वतंत्र दौर शामिल होता है। कोर्ट ने आगे कहा कि 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021' के तहत तय की गई पात्रता शर्तों को हर चक्र की शुरुआत में पूरा करना आवश्यक है।
Case Title : Veena Devi and another v. UOI

