'ज़मानत की शर्तों पर पासपोर्ट जमा करने का मतलब यह नहीं कि उसे रिन्यू नहीं कराया जा सकता': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
Shahadat
22 Sept 2026 7:41 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि ज़मानत की शर्तों के तहत पासपोर्ट जमा करने का मतलब यह नहीं है कि उसे हमेशा के लिए रिन्यू नहीं कराया जा सकता, खासकर तब जब आरोपी कानूनी कार्यवाही से भागने की कोशिश न कर रहा हो।
जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि पासपोर्ट रखने और विदेश यात्रा करने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत आज़ादी का हिस्सा है, लेकिन इस पर कानून और सक्षम अदालत के आदेशों के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
अदालत ने कहा,
"न्यायिक आदेश के तहत पासपोर्ट जमा करने का मतलब यह नहीं है कि उसे हमेशा के लिए रिन्यू नहीं कराया जा सकता, खासकर तब जब याचिकाकर्ता लंबित कार्यवाही से भागने या अपनी ज़मानत की शर्तों को कमज़ोर करने की कोशिश न कर रहा हो। पासपोर्ट रखने और विदेश यात्रा करने का अधिकार भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत गारंटीकृत व्यक्तिगत आज़ादी का हिस्सा है, जिस पर कानून और सक्षम अदालत के आदेशों के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।"
याचिकाकर्ता जग्तार सिंह पर IPC की धाराओं 406, 409, 419, 420, 467, 468, 471, 201 और 120-B के तहत FIR दर्ज है। हाई कोर्ट ने उन्हें रेगुलर ज़मानत दी थी, जिसके बाद उन्होंने ज़मानत की शर्त के तौर पर अपना पासपोर्ट जमा कर दिया था। तब से उनका पासपोर्ट एक्सपायर हो चुका है।
याचिकाकर्ता ने बरनाला के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पासपोर्ट रिन्यू कराने और विदेश यात्रा की इजाज़त के लिए अर्ज़ी दी थी, जिसे 06.11.2025 के आदेश से खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने उस आदेश को रद्द कराने के लिए CrPC की धारा 482 के तहत यह याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें FIR में मुख्य रूप से एक सह-आरोपी के बयान के आधार पर नामज़द किया गया था, जबकि संबंधित सोसाइटी के कामकाज में कथित अनियमितताओं से उन्हें सीधे जोड़ने वाला कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए अपना पासपोर्ट रिन्यू कराना चाहते हैं, जहां उनके बेटे, बहू, दामाद, बेटी और पोती रहते हैं और उनसे मिलने के लिए कह रहे हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि आवेदन को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि ज़मानत आदेश के तहत पासपोर्ट जमा किया गया और कोई ज़रूरी वजह नहीं बताई गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपनी ज़मानत की शर्तों में कोई बदलाव नहीं चाहता, बल्कि केवल पासपोर्ट को रिन्यू करने और इस्तेमाल करने की सीमित अनुमति चाहता था, जो कोर्ट द्वारा उचित समझे जाने वाले सुरक्षा उपायों के अधीन हो।
याचिका का विरोध करते हुए राज्य ने कहा कि याचिकाकर्ता ने ज़मानत की शर्तों के तहत स्वेच्छा से अपना पासपोर्ट जमा किया और कोई ऐसी ठोस या असाधारण परिस्थिति नहीं बताई, जिसके लिए ढील दी जा सके। राज्य ने कहा कि विवादित आदेश तर्कसंगत था और उसमें कोई गैर-कानूनी बात नहीं थी।
कोर्ट ने गौर किया कि मांगी गई राहत केवल पासपोर्ट के रिन्यूअल तक सीमित थी। कोर्ट ने देखा कि याचिकाकर्ता के पास एक वैध पासपोर्ट है, जिसे ज़मानत की शर्तों के अनुसार जमा किया गया और कार्यवाही के दौरान उसकी वैधता समाप्त हो गई।
कोर्ट ने माना कि न्यायिक निर्देश के अनुपालन में केवल पासपोर्ट जमा कर देने से ही रिन्यूअल पर स्थायी रोक नहीं लग सकती, खासकर तब जब याचिकाकर्ता कार्यवाही से बचना न चाहता हो या अपनी ज़मानत की शर्तों को कमज़ोर न करना चाहता हो।
आपराधिक कार्यवाही के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह एक्सपायर हो चुके पासपोर्ट को याचिकाकर्ता को लौटा दे, ताकि वह उसे रीजनल पासपोर्ट ऑफिस में पेश कर सके और रिन्यूअल के लिए आवेदन कर सके।
रिन्यू किया गया पासपोर्ट मिलने पर याचिकाकर्ता को उसे तुरंत ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा, जिसके बाद वह कार्यवाही के दौरान उस पर लागू होने वाले आदेशों और शर्तों के अधीन रहेगा।
Case Title: Jagtar Singh v. State of Punjab

