लिव-इन रिलेशनशिप में थे दोनों, संबंध बिगड़ने के बाद दर्ज हुई FIR; रेप के आरोपी म्यूजिक डायरेक्टर को नियमित जमानत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

Praveen Mishra

1 July 2026 7:11 PM IST

  • लिव-इन रिलेशनशिप में थे दोनों, संबंध बिगड़ने के बाद दर्ज हुई FIR; रेप के आरोपी म्यूजिक डायरेक्टर को नियमित जमानत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप समेत अन्य गंभीर आरोपों का सामना कर रहे एक म्यूजिक डायरेक्टर को नियमित जमानत देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि आरोपी और शिकायतकर्ता लिव-इन रिलेशनशिप में थे तथा दोनों की सगाई भी हो चुकी थी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि रेप और अन्य आरोप उस अवधि से संबंधित हैं, जो FIR दर्ज होने से काफी पहले की है और ऐसा प्रतीत होता है कि संबंध खराब होने के बाद मामला दर्ज कराया गया।

    जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने कहा कि दोनों पक्ष बालिग हैं और 6 अगस्त 2025 को उनकी सगाई हुई थी। अदालत ने कहा कि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान होगा।

    एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता, जो एक अभिनेत्री है, ने आरोप लगाया कि उसकी आरोपी से 2025 में सोशल मीडिया के माध्यम से पहचान हुई। इसके बाद आरोपी ने नशीला पदार्थ देकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए, अश्लील वीडियो रिकॉर्ड किए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर कई बार दुष्कर्म किया। उसने शिमला और पठानकोट की यात्राओं के दौरान भी यौन शोषण, मारपीट, धमकी और जबरन नशीले पदार्थ खिलाने के आरोप लगाए।

    वहीं, आरोपी की ओर से कहा गया कि दोनों के बीच सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप थी और शिकायतकर्ता अपनी मां के साथ भी उसके घर पर रह चुकी थी। यह भी दलील दी गई कि संबंध खराब होने के बाद झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह एक महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और मामले में कोई बरामदगी शेष नहीं है।

    राज्य और शिकायतकर्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और आरोपी के रिहा होने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या शिकायतकर्ता को प्रभावित कर सकता है।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों के लिव-इन रिलेशनशिप और सगाई में होने का तथ्य विवादित नहीं है। साथ ही, आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 12 मई 2026 से हिरासत में है। मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि का प्रश्न ट्रायल में तय होगा और उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को नियमित जमानत दी जा सकती है।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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