PG मेडिकल दाखिले के लिए पहले 2 साल ग्रामीण सेवा जरूरी नहीं, 5 साल का बॉन्ड पर्याप्त: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
Praveen Mishra
10 Aug 2026 5:43 PM IST

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि हरियाणा में 40% इन-सर्विस कोटे के तहत पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए डॉक्टरों का पहले से दो साल ग्रामीण, दूरदराज या कठिन क्षेत्र में सेवा करना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, उन्हें PG डिग्री हासिल करने के बाद ऐसे क्षेत्रों में 5 साल सेवा देने का बॉन्ड देना होगा।
कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने उन MBBS डॉक्टरों की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने इन-सर्विस कोटे का लाभ केवल उन डॉक्टरों तक सीमित करने की मांग की थी, जिन्होंने पहले ही दो साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा की हो।
कोर्ट ने कहा कि राज्य की नीति का उद्देश्य ग्रामीण और कठिन क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यह उद्देश्य PG की पढ़ाई पूरी करने के बाद 5 साल ग्रामीण/दूरदराज/कठिन क्षेत्रों में सेवा देने के बॉन्ड से पर्याप्त रूप से पूरा होता है।
दो श्रेणियों में अंतर वैध
कोर्ट ने यह भी माना कि जिन इन-सर्विस डॉक्टरों ने पहले ही दो साल ग्रामीण या कठिन क्षेत्रों में सेवा की है, उन्हें PG कोर्स के दौरान पूरी सैलरी और अन्य सेवा लाभ दिए जाते हैं। वहीं, जिन्होंने ऐसी सेवा नहीं की है, उन्हें केवल लियन, वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता का लाभ मिलता है, लेकिन पढ़ाई के दौरान वेतन नहीं दिया जाता।
हाईकोर्ट ने इस अंतर को संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत वैध वर्गीकरण माना। कोर्ट ने कहा कि दोनों श्रेणियों के बीच स्पष्ट आधार है और इसका ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के उद्देश्य से सीधा संबंध है।
कोर्ट ने Tamil Nadu Medical Officers Association v. Union of India के फैसले का भी हवाला दिया, लेकिन कहा कि उस फैसले को हर इन-सर्विस कोटे में पहले से ग्रामीण सेवा को अनिवार्य शर्त मानने के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता।
अदालत ने माना कि हरियाणा सरकार को इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने का अधिकार है और 2 सितंबर 2024 की अधिसूचना न तो राज्य की विधायी क्षमता से बाहर है और न ही संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।


