पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आरडब्ल्यूए स्तर पर आवारा जानवरों के लिए फीडिंग स्पॉट घोषित करने की याचिका पर केंद्र, राज्य से जवाब मांगा

Praveen Mishra

6 April 2024 4:49 PM IST

  • पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आरडब्ल्यूए स्तर पर आवारा जानवरों के लिए फीडिंग स्पॉट घोषित करने की याचिका पर केंद्र, राज्य से जवाब मांगा

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से आवारा जानवरों के लिए आवासीय क्षेत्रों में आवश्यक भोजन स्थलों की घोषणा करने और हरियाणा में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन स्तर पर पशु कल्याण बोर्ड का गठन करने के निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका पर जवाब मांगा है।

    जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने केंद्र सरकार, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड, हरियाणा सरकार, नगर निगम, पुलिस आयुक्त, आरडब्ल्यूए, फरीदाबाद को नोटिस जारी किया।

    फरीदाबाद निवासी नीतू कुमारी और सोनिया सिंह ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय आरडब्ल्यूए आसपास के आवारा पशुओं को खिलाने पर आपत्ति उठा रही है।

    यह प्रस्तुत किया गया है कि उन्हें "कुत्तों को खिलाने और उनकी देखभाल करने के उनके मौलिक अधिकार से वंचित किया गया है और मौजूदा कानूनों और उदाहरणों का स्पष्ट उल्लंघन किया गया है।

    डॉ. माया डी. छबलानी बनाम राधा मित्तल और अन्य मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर भरोसा किया गया है, जिसमें न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सभी कानून प्रवर्तन प्राधिकरण, आरडब्ल्यूए यह सुनिश्चित करें कि निर्दिष्ट भोजन स्थल पर स्ट्रीट डॉग को खिलाने वाले व्यक्ति को कोई उत्पीड़न या बाधा न हो और राज्य से पालतू कुत्तों और स्ट्रीट डॉग्स पर एडब्ल्यूबीआई के संशोधित दिशानिर्देशों को ठीक से लागू करने के लिए कहा जाए।

    याचिका में प्रतिवादियों से निर्देश देने की मांग की गई है कि याचिकाकर्ताओं को इलाके में जानवरों, विशेष रूप से कुत्तों और बिल्लियों को खिलाने और उनकी देखभाल करने की अनुमति दी जाए।

    रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन सदस्यों और पुलिस को निर्देश देने के लिए भी प्रार्थना की जाती है कि वे आवारा जानवरों को खिलाने के लिए याचिकाकर्ताओं को परेशान करने से रोकें।

    मामले को आगे की सुनवाई के लिए 27 मई तक के लिए टाल दिया गया है।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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