प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) के आधार पर निजी जमीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता राज्य: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

Praveen Mishra

26 Jun 2026 3:17 PM IST

  • प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) के आधार पर निजी जमीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता राज्य: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) होने के नाते सरकार निजी भूमि पर प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) का दावा कर मालिकाना हक हासिल नहीं कर सकती। अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि सिंचाई नहर (डिस्ट्रिब्यूटरी) के लिए इस्तेमाल की गई निजी जमीन का उचित मुआवजा तीन महीने के भीतर भूमि मालिकों को दिया जाए।

    2026 LiveLaw (PH) 209 में जस्टिस रमेश कुमारी ने कहा कि राज्य का दायित्व नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा करना है। सरकार नागरिकों की जमीन पर अवैध कब्जा कर स्वयं "कब्जाधारी (Squatter)" नहीं बन सकती और न ही प्रतिकूल कब्जे के सिद्धांत का सहारा लेकर निजी संपत्ति पर स्वामित्व का दावा कर सकती है।

    मामला फतेहाबाद जिले के बनमंदोरी गांव की 119 कनाल भूमि से जुड़ा था, जिसमें से 7 कनाल भूमि पर राज्य ने सिंचाई के लिए डिस्ट्रिब्यूटरी का निर्माण कर उसे पक्का कर दिया था। भूमि मालिकों का कहना था कि उनकी जमीन का न तो विधिवत अधिग्रहण किया गया और न ही कोई मुआवजा दिया गया।

    राज्य ने दलील दी कि डिस्ट्रिब्यूटरी वर्ष 1960 से अस्तित्व में है और उसका कब्जा खुला, निरंतर और प्रतिकूल (hostile) रहा है, इसलिए वह प्रतिकूल कब्जे के आधार पर मालिक बन चुका है।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय अदालत के फैसलों को पलटते हुए कहा कि राज्य सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भी किसी की जमीन का उपयोग बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए और मुआवजा दिए नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 300-ए के तहत संवैधानिक और मानव अधिकार है, जिसे कानून के अधिकार के बिना छीना नहीं जा सकता।

    अदालत ने पाया कि राज्य ने जमीन का अधिग्रहण किए बिना और कोई भुगतान किए बिना उस पर कब्जा कर लिया। इसलिए कोर्ट ने इसे "Deemed Acquisition" का मामला मानते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि संबंधित 7 कनाल भूमि का उचित बाजार मूल्य, साथ ही सोलाटियम, ब्याज और अन्य सभी वैधानिक लाभ तीन महीने के भीतर भूमि मालिकों को अदा किए जाएं।

    Next Story