Haryana Panchayati Raj Act | अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बैठक बुलाने के लिए बहुमत की आवश्यकता नहीं: हाईकोर्ट

  • Haryana Panchayati Raj Act | अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बैठक बुलाने के लिए बहुमत की आवश्यकता नहीं: हाईकोर्ट

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा पंचायती राज अधिनियम के तहत अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाने के समय सदस्यों के बहुमत की उपस्थिति आवश्यक नहीं है।

    जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने कहा,

    "नियम में कोई वैधानिक रूप से निर्धारित संख्या नहीं है, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बैठक को सुचारू रूप से बुलाने के लिए अपेक्षित व्यक्तियों की विशिष्ट संख्या से संबंधित है। इसके विपरीत, जब याचिकाकर्ताओं के वकील ने अधिनियम 1994 की धारा 62 के प्रावधान पर गलत तरीके से भरोसा किया तो यह गलत तर्क दिया गया कि उसमें उल्लिखित संख्या, बैठक के अपेक्षित व्यक्तियों द्वारा जुटाई जाने वाली संख्या है।"

    ये टिप्पणियां उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की गईं, जिसमें अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा पंचायत समिति पूंडरी, कैथल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बैठक दोबारा बुलाने की अधिसूचना को चुनौती दी गई, जबकि तथा पंचायत समिति पूंडरी, जिला कैथल के उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बैठक दोबारा बुलाई गई।

    याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि जब अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए पिछली बैठक नहीं बुलाई गई तो पंचायत समिति के 7 से 8 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए अपना समर्थन वापस ले लिया।

    हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 62 का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बहुमत अर्थात 2/3 की आवश्यकता होती है। चूंकि 7 से 8 सदस्यों ने अपना समर्थन वापस ले लिया, इसलिए नई बैठक नहीं बुलाई जा सकती।

    प्रस्तुतियों की जांच करने के बाद न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज की,

    "यह तर्क पूरी तरह से अनुमान है और 1994 के अधिनियम की धारा 62 के प्रावधानों की पूरी तरह से गलत व्याख्या पर आधारित है।"

    जस्टिस ठाकुर ने स्पष्ट किया कि पंचायती राज अधिनियम की धारा 62 के अनुसार, बहुमत की आवश्यकता केवल उस समय होती है, जब याचिकाकर्ता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाता है और अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए बैठक का अनुरोध करने के समय बहुमत की आवश्यकता नहीं होती है।

    न्यायालय ने कहा,

    "इस प्रकार, अधियाचियों की संख्या में कमी या कमी आई। फिर भी 1994 के अधिनियम की धारा 62 के सुप्रा प्रावधान के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव के सफल पारित होने के लिए केवल 2/3 बहुमत की आवश्यकता थी। भले ही उक्त कमी से निर्वाचन मंडल के 2/3 सदस्यों का अपेक्षित समर्थन प्राप्त करने के लिए अधियाचना नोटिस नहीं बन पाया हो।"

    उपर्युक्त के आलोक में पीठ ने निष्कर्ष निकाला,

    "विशेष रूप से जब कानून अधियाचियों की संख्यात्मक शक्ति निर्धारित नहीं करता है तो वर्तमान याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित करने पर विचार करने के लिए बैठक के सक्षम आयोजन की मांग करना उचित है। इसके परिणामस्वरूप, जैसा कि सुप्रा ने कहा है, प्रभाव...जिससे अधियाचियों की संख्या में कमी आई, इस प्रकार यह अप्रासंगिक हो जाता है।"

    केस टाइटल: महेंद्रो देवी और अन्य बनाम हरियाणा राज्य और अन्य]

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