हरभजन सिंह की सुरक्षा इसलिए नहीं हटाई गईकि उन्होंने AAP छोड़ी, उनके घर के बाहर 'गद्दार' कहकर विरोध करना कोई खतरा नहीं: हाईकोर्ट
Shahadat
17 July 2026 4:26 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने के मामले में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट का मानना है कि आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के बाद उनके घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन और उन्हें "गद्दार" बताने वाले पोस्टर लगाने से उनकी जान और आज़ादी को खतरा साबित नहीं होता।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कहा,
"यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा अचानक पार्टी छोड़ने की वजह से हटाई गई। सुरक्षा हटाने का फैसला रिव्यू कमेटी ने बहुत पहले ही ले लिया था, जिसे नकारा नहीं गया। उनके घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन या उन्हें गद्दार कहे जाने से उनकी जान और आज़ादी को खतरा साबित नहीं होता।"
कोर्ट ने आगे कहा कि विरोध-प्रदर्शन हिंसक भी नहीं था। इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने CRPF के ज़रिए सिंह को पहले ही 'Y+' कैटेगरी की सुरक्षा दी हुई। साथ ही,राज्य सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि जब भी वह राज्य में होंगे, स्थानीय स्तर पर तैनाती के ज़रिए उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा।
कोर्ट पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने 25.04.2026 का आदेश रद्द करने की मांग की, जिसके तहत पंजाब पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (सुरक्षा) ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी। उन्होंने सुरक्षा बहाल करने के लिए 'मैन्डमस' (आदेश) की भी मांग की थी, क्योंकि उनका तर्क था कि सुरक्षा बिना किसी नए खतरे के आकलन या सुनवाई का मौका दिए बिना हटा ली गई।
पंजाब से राज्यसभा के निर्वाचित सांसद सिंह को आम आदमी पार्टी का सदस्य रहते हुए लगभग पच्चीस पुलिसकर्मियों की सुरक्षा दी गई थी। राजनीतिक मतभेदों के कारण उन्होंने 24.04.2026 को पार्टी छोड़ दी और ठीक अगले ही दिन, विवादित आदेश के ज़रिए उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई।
सिंह के वकील ने तर्क दिया कि पार्टी छोड़ने के एक दिन बाद सुरक्षा वापस लेने से वे असुरक्षित हो गए, खासकर तब जब जालंधर में उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और घर के बाहर उन्हें "गद्दार" बताने वाले पोस्टर चिपकाए गए — जिनकी तस्वीरें रिकॉर्ड पर रखी गईं — जो लगातार बने हुए खतरे को दिखाते हैं, जिसे देखते हुए रातों-रात सुरक्षा वापस लेने को सही नहीं ठहराया जा सकता।
राज्य के वकील ने पंजाब पुलिस (सुरक्षा) के असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल द्वारा 20.05.2026 को दिए गए हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा वापस लेने का फैसला सिक्योरिटी रिव्यू कमेटी द्वारा 03.03.2026 को किए गए खतरे के आकलन (थ्रेट असेसमेंट) के आधार पर लिया गया। यह फैसला सिंह के सत्ताधारी पार्टी (AAP) छोड़ने से काफी पहले लिया गया और इसमें किसी भी संबंधित विभाग ने सिंह के लिए किसी खास खतरे की बात नहीं कही। हलफनामे में यह भी कहा गया कि पंजाब में जालंधर के बाहर सिंह की गतिविधियां बहुत कम थीं और वे मुख्य रूप से राज्य के बाहर रहते थे।
इसके बाद जालंधर के पुलिस कमिश्नर को स्थानीय स्तर पर तैनाती के जरिए उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने का निर्देश दिया गया और पहले से तैनात सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया गया। यह भी बताया गया कि लागू सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत राज्य की सीमा के बाहर पंजाब के सुरक्षाकर्मियों की तैनाती आम तौर पर केवल 72 घंटों के लिए ही की जा सकती है।
राज्य के वकील ने आगे कहा कि गृह मंत्रालय के 04.05.2026 के आदेश के तहत सिंह को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के माध्यम से पहले ही 'Y+' कैटेगरी की खास सुरक्षा दी जा चुकी थी, और जब भी वे पंजाब आते तो खतरे के आकलन के आधार पर स्थानीय स्तर पर तैनाती करके उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाता।
कोर्ट ने पाया कि सिंह की पंजाब सुरक्षा वापस लेने का फैसला बिना किसी विवाद के सिक्योरिटी रिव्यू कमेटी ने 03.03.2026 को ही ले लिया था — जो उनके 24.04.2026 को पार्टी छोड़ने से काफी पहले की बात है — और इसलिए इसे उनके राजनीतिक कदम से जुड़ा अचानक या बदले की भावना से लिया गया कदम नहीं कहा जा सकता।
इन हालात को देखते हुए कोर्ट ने माना कि आगे किसी निर्देश की जरूरत नहीं है और याचिका का निपटारा कर दिया।
Title: Harbhajan Singh v. State of Punjab and others


