'शादी के बाहर महिला द्वारा आपसी सहमति से बनाया गया शारीरिक संबंध व्यभिचार, तथ्यों की गलतफहमी नहीं': पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप की FIR रद्द की
Shahadat
2 April 2026 10:53 AM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि जहां कोई वयस्क महिला अपनी मर्ज़ी से लंबे समय तक किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाती है तो ऐसे आचरण को तथ्यों की गलतफहमी के आधार पर किया गया काम नहीं माना जा सकता, जिससे कि उस पर IPC की धारा 376 के तहत रेप का आरोप लगाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में यह रिश्ता आपसी सहमति से बने संबंध को दर्शाता है।
जस्टिस एन.एस. शेखावत IPC की धारा 376(2) के तहत दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। यह FIR पीड़िता के पति की शिकायत पर IPC की धारा 482 के तहत दायर की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता, जो परिवार का परिचित स्केटिंग कोच था, ने पीड़िता के साथ संबंध बना लिए। बाद में ज़बरदस्ती उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और उसे ब्लैकमेल किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उनके बीच बना रिश्ता आपसी सहमति से था। यह भी बताया गया कि दोनों परिवारों के बीच आना-जाना था, पीड़िता ने काफी लंबे समय तक इस रिश्ते को जारी रखा था, और जांच के दौरान ब्लैकमेल के आरोपों को साबित करने वाला कोई भी सबूत नहीं मिला।
कोर्ट ने कहा कि वह जांच या ट्रायल के चरण में आपराधिक कार्यवाही में दखल देने के मामले में काफी सतर्क रहेगा। हालांकि, कुछ ऐसे मामले भी होते हैं, जहां कोर्ट किसी भी कोर्ट की प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए या न्याय सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक कार्यवाही रद्द कर सकता है।
कोर्ट ने FIR में लगाए गए आरोपों की जांच की और पाया कि पीड़िता और याचिकाकर्ता के बीच पहले दोस्ती हुई, जो बाद में शारीरिक संबंध में बदल गई। कोर्ट ने आगे कहा कि पीड़िता ने अपने पति को बिना बताए गर्भपात करवा लिया था। उसने इस रिश्ते के बारे में तभी बताया जब उसे इस बारे में पूछा गया और तलाक देने की धमकी दी गई। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि शारीरिक संबंध बनाने की कथित घटनाएं काफी लंबे समय तक चलती रहीं।
कोर्ट ने कहा,
"इस मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर केवल एक ही उचित निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि प्रतिवादी नंबर 3 और याचिकाकर्ता के बीच पहले दोस्ती हुई। बाद में उनके बीच शारीरिक संबंध भी बन गए।"
कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला, जिससे यह पता चले कि इस रिश्ते के दौरान पीड़िता को ब्लैकमेल किया गया। इसमें यह बात नोट की गई कि वह एक समझदार और पढ़ी-लिखी महिला है, जिसने लंबे समय तक यह रिश्ता बनाए रखा और जांच के दौरान ब्लैकमेल का कोई सबूत नहीं मिला।
कोर्ट ने यह टिप्पणी की:
“दरअसल, अगर कोई पूरी तरह से बालिग महिला अपनी मर्ज़ी से शारीरिक संबंध बनाती है और लगातार ऐसी गतिविधियों में शामिल रहती है तो यह उसकी तरफ से 'अनैतिक आचरण' (Promiscuity) माना जाएगा, न कि तथ्यों की गलतफहमी के कारण किया गया कोई काम।”
कोर्ट ने पाया कि ऐसी परिस्थितियों में IPC की धारा 375 के तहत अपराध के ज़रूरी तत्व (Ingredients) पूरे नहीं होते। इसलिए हाईकोर्ट ने याचिका मंज़ूर कर ली और FIR के साथ-साथ उससे जुड़ी सभी आगे की कानूनी कार्रवाई रद्द की।
Case Title: Anil Sharma v. State of U.T., Chandigarh & Ors. [CRM-M-1885 of 2021 (O&M)]

