जनगणना 2027: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जनगणना ड्यूटी के लिए प्राइवेट स्कूलों के टीचरों की जानकारी मांगने वाले आदेशों पर रोक लगाई
Shahadat
14 Oct 2026 8:08 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकारियों द्वारा जारी उन दो आदेशों पर रोक लगाई, जिनमें जनगणना 2027 की ड्यूटी के लिए प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के टीचरों की जानकारी मांगी गई। यह रोक सिर्फ़ प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले (unaided) स्कूलों पर लागू होती है।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने नोटिस जारी किया और आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक, 1 सितंबर 2026 और 7 सितंबर 2026 के आदेश "प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों के मामले में रुके रहेंगे।"
याचिकाकर्ता ने पहले CWP नंबर 17416/2026 दायर की, जिसमें जनगणना ड्यूटी के लिए प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों के टीचिंग स्टाफ़ को बुलाने के खिलाफ़ सुरक्षा मांगी गई। वह याचिका 29 मई 2026 को वापस ले ली गई, जिसमें यह छूट दी गई कि अगर स्कूलों से दोबारा जनगणना के काम के लिए स्टाफ़ भेजने को कहा जाता है तो नई याचिका दायर की जा सकती है।
यह मौजूदा याचिका तब दायर की गई, जब अधिकारियों ने जनगणना 2027 के लिए प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के टीचरों की जानकारी मांगने वाले नए आदेश जारी किए।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि न तो जनगणना अधिनियम, 1948 और न ही इसके तहत बने नियम अधिकारियों को प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों के टीचरों को एन्यूमेरेटर या सुपरवाइज़र के तौर पर बुलाने का अधिकार देते हैं।
उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 4A में केवल स्थानीय अधिकारियों के स्टाफ़ और अफ़सरों को जनगणना के काम के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान है। प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूल और उनके कर्मचारी "स्थानीय प्राधिकरण" की परिभाषा में नहीं आते हैं। वकील के अनुसार, अधिकारी प्रशासनिक निर्देशों या आदेशों के ज़रिए धारा 4A के तहत मिले कानूनी अधिकार का दायरा नहीं बढ़ा सकते, इसलिए विवादित आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
वकील ने आगे तर्क दिया कि इस कार्रवाई से सदस्य स्कूलों के अपने संस्थानों को चलाने और उनका प्रबंधन करने के अधिकार में दखल पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों के टीचरों को पढ़ाने से पूरी तरह अलग काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार न हो। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ये आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) का उल्लंघन करते हैं।
टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य (2002) 8 SCC 481 मामले में ग्यारह जजों की बेंच के फैसले के पैराग्राफ 54 का हवाला देते हुए, वकील ने तर्क दिया कि प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले संस्थानों को अपने प्रशासन और मैनेजमेंट में स्वायत्तता (आज़ादी) प्राप्त है और रेगुलेटरी उपाय इससे आगे नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के उनके शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्यों में अनिवार्य रूप से लगाना, उस स्वायत्तता में अनुचित हस्तक्षेप होगा।
हरियाणा के AAG ने राज्य प्रतिवादियों की ओर से नोटिस स्वीकार किया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कोई भी जवाब अगली तारीख से कम-से-कम सात दिन पहले दाखिल किया जाए और उसकी एक अग्रिम प्रति विपक्षी वकील को भी दी जाए।
अगली सुनवाई तक कोर्ट ने 01.09.2026 और 07.09.2026 के आदेशों के अमल पर रोक लगाई, जहां तक वे प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों से संबंधित हैं।
यह मामला 29 अप्रैल, 2027 के लिए सूचीबद्ध है।
Case Title : HARYANA PROGRESSIVE SCHOOLS CONFERENCE VERSUS UNION OF INDIA AND OTHERS

