चंडीगढ़ में अब तक फैमिली कोर्ट न बनना 'गंभीर मुद्दा': पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जल्द स्थापना के दिए निर्देश

Amir Ahmad

10 Aug 2026 4:42 PM IST

  • चंडीगढ़ में अब तक फैमिली कोर्ट न बनना गंभीर मुद्दा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जल्द स्थापना के दिए निर्देश

    चंडीगढ़ में अब तक फैमिली कोर्ट की स्थापना नहीं होने को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने “गंभीर मुद्दा” बताया। कोर्ट ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों को चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट स्थापित करने की दिशा में जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

    चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बताया गया कि चंडीगढ़ जिला कोर्ट परिसर में अब तक अलग से फैमिली कोर्ट स्थापित नहीं किया गया, जबकि हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 में ही इसके गठन को मंजूरी दे दी थी।

    सुनवाई के दौरान पक्षकारों के मौखिक अनुरोध पर खंडपीठ ने भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के सचिव के माध्यम से केंद्र सरकार को भी मामले में पक्षकार बनाया। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश की प्रति भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन के कार्यालय भेजने का निर्देश दिया, ताकि आवश्यक निर्देश प्राप्त किए जा सकें या जरूरत होने पर जवाब दाखिल किया जा सके।

    हाईकोर्ट ने कहा,

    “अगली निर्धारित तारीख तक हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित पक्ष चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट की स्थापना के लिए जल्द से जल्द पर्याप्त कदम उठाएंगे।”

    मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। याचिकाकर्ता को दो दिन के भीतर संशोधित पक्षकार विवरण रजिस्ट्री में दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

    याचिका में कहा गया कि चंडीगढ़ को भले ही 'सिटी ब्यूटीफुल' के रूप में जाना जाता हो, लेकिन यहां के जिला कोर्ट में अलग और स्वतंत्र फैमिली कोर्ट जैसी बुनियादी न्यायिक सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। याचिका के अनुसार, फैमिली कोर्ट की स्थापना का उद्देश्य विवाह और पारिवारिक विवादों का तेजी और प्रभावी तरीके से निपटारा करना है।

    याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ प्रशासन आवश्यक अधिसूचना जारी करने में वर्षों से निष्क्रिय बना हुआ। याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 256 के तहत अपने दायित्व का पालन करने में प्रशासन करीब नौ वर्षों से विफल रहा है।

    याचिका के अनुसार, चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट की स्थापना को 6 अक्टूबर 2017 को ही हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस द्वारा मंजूरी दी गई। उसी दिन चंडीगढ़ प्रशासन से जिला एवं सत्र जज स्तर के न्यायिक अधिकारी के एक पद तथा आवश्यक सहायक कर्मचारियों और उनके वेतनमान को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया।

    इसके बाद हाईकोर्ट की ओर से 16 फरवरी 2018 से लेकर 29 अप्रैल 2025 तक चंडीगढ़ प्रशासन को कई पत्र और अनुस्मारक भेजे गए। इनमें दो फैमिली कोर्ट स्थापित करने, दो जिला एवं सत्र जज स्तर के न्यायिक अधिकारियों के पदों तथा आवश्यक सहायक कर्मचारियों को मंजूरी देने और आवश्यक अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया गया।

    याचिकाकर्ता ने बताया कि उसे इस वर्ष समाचार रिपोर्ट के माध्यम से चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट नहीं होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने जिला कोर्ट, चंडीगढ़ के लोक सूचना अधिकारी से जानकारी मांगी। वहां से उन्हें हाईकोर्ट के लोक सूचना अधिकारी से संपर्क करने को कहा गया।

    जून 2026 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के लोक सूचना अधिकारी के समक्ष दोबारा आवेदन किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्राप्त जवाब से यह स्थिति सामने आई कि वर्ष 2017 में स्थापना को मंजूरी मिलने के बावजूद फैमिली कोर्ट की स्थापना के लिए आवश्यक प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई।

    हाईकोर्ट ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट की स्थापना की प्रक्रिया को अब और लंबित न रखने तथा अगली सुनवाई तक ठोस कदम उठाने की अपेक्षा जताई है।

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