गवाह का बयान FIR का आधार हो तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के आधार पर की जा सकती है: पटना हाईकोर्ट
Praveen Mishra
6 May 2026 9:14 PM IST

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी गवाह का बयान ही FIR का आधार बनता है, तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के संदर्भ में की जा सकती है और ऐसी स्थिति में FIR भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रासंगिक तथ्य बन जाती है।
जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ दो आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जो बेगूसराय की बरौनी थाना कांड संख्या 47/2012 से संबंधित थीं। अपीलकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट ने IPC की धारा 364/34, 302/34 और 120B के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अभियोजन के अनुसार, FIR सूचक (PW-3) के फर्दबयान पर दर्ज की गई थी। सूचक ने बताया था कि 17 फरवरी 2012 की रात कुछ लोग उसके भाई को दुकान से अपने साथ ले गए। जब वह पीछे गया तो उसने आरोपियों को उसके भाई के साथ मारपीट करते और फिर मोटरसाइकिल पर जबरन ले जाते देखा। बाद में मृतक का शव मिला और अभियोजन ने दावा किया कि ₹5 लाख के लेन-देन विवाद में हत्या की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि सामान्यतः FIR कोई ठोस साक्ष्य नहीं होती और उसका उपयोग केवल पुष्टि या विरोधाभास के लिए किया जाता है। हालांकि, Ram Kumar Pandey v. State of M.P. फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि किसी गवाह का बयान FIR का आधार हो, तो अभियोजन के पूरे मामले की जांच FIR के आधार पर की जा सकती है।
रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की जांच के बाद कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाह एक-दूसरे की उपस्थिति की पुष्टि नहीं करते और उनके बयान आपस में विरोधाभासी हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पुलिस को रात में सूचना दिए जाने और तलाश किए जाने का दावा किया गया, लेकिन उससे संबंधित कोई स्टेशन डायरी एंट्री या कॉल डिटेल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।
कोर्ट ने FIR के समय और परिस्थितियों को लेकर भी गंभीर विसंगतियां पाईं। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पहले कोई प्रारंभिक संस्करण था, जिसे बाद में छोड़कर काफी विचार-विमर्श के बाद नई FIR दर्ज कराई गई।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन “लास्ट सीन” सिद्धांत और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला साबित करने में विफल रहा है। परिणामस्वरूप, अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया तथा दोनों अपीलों को मंजूर कर लिया।

