कोविड-19 से मौत पर मुआवजे का दावा अस्पताल की रिपोर्ट में तारीख की गड़बड़ी के आधार पर खारिज नहीं कर सकते: पटना हाईकोर्ट
Praveen Mishra
14 Oct 2026 2:30 PM IST

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि कोविड-19 से हुई मौत के मामले में अनुग्रह राशि (Ex-gratia Compensation) के वास्तविक दावे को केवल अस्पताल की प्रयोगशाला रिपोर्ट में दर्ज तारीख में विसंगति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब अस्पताल स्वयं इस बात की पुष्टि कर चुका हो कि मृतक की कोविड-19 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव थी।
जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने शांति देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने पति राम भजन चौधरी की मृत्यु के बाद मुआवजे की मांग की थी।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता के पति राम भजन चौधरी को 5 जनवरी 2022 को बुखार, खांसी और कमजोरी की शिकायत के बाद पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। उनकी जांच शाम करीब 5:36 बजे हुई और भर्ती से पहले RT-PCR जांच कराने की सलाह दी गई। हालांकि, उसी दिन शाम करीब 6:20 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
शांति देवी ने 7 मार्च 2022 को कोविड-19 से मृत्यु के लिए निर्धारित अनुग्रह राशि का दावा प्रस्तुत किया। इसके साथ मृत्यु प्रमाणपत्र, कोविड-19 पॉजिटिव रिपोर्ट, परिवार का विवरण, बैंक संबंधी जानकारी, आधार कार्ड और चिकित्सा रिकॉर्ड सहित आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए।
हालांकि, 3 फरवरी 2023 को जारी मेमो संख्या 6568 के माध्यम से उनका दावा अस्वीकृत सूची में डाल दिया गया। अधिकारियों ने इसके पीछे यह कारण बताया कि प्रयोगशाला रिपोर्ट में जांच की तारीख 6 जनवरी 2022 दर्ज थी, जबकि राम भजन चौधरी की मृत्यु 5 जनवरी 2022 को हो चुकी थी।
याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?
शांति देवी की ओर से दलील दी गई कि रिपोर्ट में तारीख का अंतर अस्पताल की ओर से हुई लिपिकीय या डेटा एंट्री संबंधी गलती का परिणाम था।
उन्होंने इमरजेंसी आउटडोर रजिस्ट्रेशन स्लिप का हवाला दिया, जिसमें पति की मृत्यु से पहले ही RT-PCR सैंपल का संदर्भ नंबर “RT-57779” दर्ज था।
इसके अलावा, NMCH के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 8 फरवरी 2024 को जारी पत्र में पुष्टि की थी कि 68 वर्षीय राम भजन चौधरी के सैंपल आईडी 57779 की कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव थी। रिपोर्ट में CT वैल्यू 21.3 दर्ज थी। हालांकि, अस्पताल के रिकॉर्ड में सैंपल संग्रह और जांच की तारीख 6 जनवरी 2022 लिखी गई थी।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने दलील दी कि राज्य स्वास्थ्य समिति की तीन सदस्यीय समिति ने प्रयोगशाला रिपोर्ट में दर्ज तारीख के आधार पर दावा खारिज किया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी लिया संज्ञान
हाईकोर्ट ने Gaurav Kumar Bansal v. Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया। इस फैसले में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 12(iii) के तहत कोविड-19 से हुई मृत्यु के लिए अनुग्रह राशि प्राप्त करने की पात्रता के मानदंड निर्धारित किए गए थे।
कोर्ट ने गौर किया कि इन मानदंडों में RT-PCR जांच से कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए व्यक्तियों की मृत्यु के मामले शामिल हैं। इसके अलावा, अस्पताल में भर्ती मरीज को इलाज करने वाले चिकित्सक द्वारा चिकित्सकीय रूप से कोविड-19 का मामला निर्धारित किए जाने की स्थिति भी संबंधित मानदंडों के तहत विचारणीय है।
'केवल तारीख में अंतर के आधार पर वास्तविक दावे को खारिज नहीं किया जा सकता'
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता का दावा केवल प्रयोगशाला रिकॉर्ड में दर्ज तारीख के अंतर के कारण खारिज किया गया था। अधिकारियों ने इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन स्लिप, अस्पताल की ओर से बाद में दी गई पुष्टि और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों पर उचित विचार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि अस्पताल के रिकॉर्ड में तारीख की विसंगति को ही आधार बनाकर दावा खारिज करना, जबकि अस्पताल स्वयं कोविड-19 पॉजिटिव रिपोर्ट की पुष्टि कर चुका है, उचित नहीं है।
अदालत ने टिप्पणी की,
“राज्य के अधिकारी कोविड-19 से हुई मृत्यु के वास्तविक दावे को केवल अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज तारीख के अंतर जैसी तकनीकी वजह से खारिज नहीं कर सकते, खासकर तब जब अस्पताल ने स्वयं पुष्टि की हो कि मृतक का सैंपल जांच में पॉजिटिव पाया गया था।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान राज्य को मानवीय पीड़ा का मूक दर्शक नहीं मानता, बल्कि उससे कल्याण और गरिमा की रक्षा करने वाले सक्रिय संरक्षक की भूमिका निभाने की अपेक्षा करता है।
चार लाख रुपये के मुआवजे पर पुनर्विचार का निर्देश
हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन स्लिप और अन्य प्रासंगिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए शांति देवी के दावे पर दोबारा विचार करे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पुनर्विचार के बाद याचिकाकर्ता पात्र पाई जाती हैं, तो लागू कोविड-19 राहत योजना के तहत 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और उससे जुड़े अन्य लाभ चार सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं।
इन निर्देशों के साथ पटना हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली।

