मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना 'बिजली की चोरी' नहीं: पटना हाईकोर्ट

Shahadat

8 Aug 2026 6:16 PM IST

  • मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना बिजली की चोरी नहीं: पटना हाईकोर्ट

    पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली का बिल न भरना, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135 के तहत बिजली की चोरी नहीं माना जाएगा, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि कनेक्शन असल में काट दिया गया या उपभोक्ता ने मीटर से छेड़छाड़ की थी।

    जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच ने कहा कि भले ही उपभोक्ता बकाया बिजली बिल चुकाने के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है, लेकिन बेईमानी से बिजली इस्तेमाल करने के सबूत के बिना उस पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

    याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 135 के तहत दर्ज FIR रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। बिजली विभाग के अनुसार, अधिकारियों ने छापेमारी की और पाया कि याचिकाकर्ता बिजली का इस्तेमाल कर रहा था, जबकि ₹5.39 लाख से ज़्यादा का बकाया होने के कारण उसका घरेलू कनेक्शन जनवरी 2021 में काट दिया गया। FIR में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने बकाया बिल चुकाए या कनेक्शन दोबारा जुड़वाए बिना बिजली का इस्तेमाल जारी रखा, जिससे साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) को ₹1.96 लाख का नुकसान हुआ।

    कोर्ट के सामने याचिकाकर्ता ने माना कि बिजली का बिल बकाया था, लेकिन इस बात से इनकार किया कि उसका कनेक्शन कभी काटा गया। उसने बताया कि इंस्पेक्शन रिपोर्ट में मीटर से छेड़छाड़ या अनधिकृत बाईपास का कोई ज़िक्र नहीं था, और कहा कि वह मौजूदा मीटर के ज़रिए बिजली का इस्तेमाल करता रहा और बकाया बिल चुकाने को तैयार था।

    दूसरी ओर, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने तर्क दिया कि कनेक्शन जनवरी 2021 में काट दिया गया और इंस्पेक्शन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने उसके बाद बेईमानी से बिजली का इस्तेमाल किया।

    रिकॉर्ड की जांच करने के बाद कोर्ट ने पाया कि कनेक्शन काटने का आरोप अधिकारियों द्वारा पेश किए गए सबूतों से साबित नहीं होता। बेंच ने गौर किया कि न तो FIR और न ही इंस्पेक्शन रिपोर्ट में यह दर्ज था कि मीटर से छेड़छाड़ की गई, सप्लाई को फिजिकली काटा गया, या मीटर को सील किया गया। इसके बजाय, इंस्पेक्शन से पता चला कि मीटर चालू था और समय के साथ उसकी रीडिंग स्वाभाविक रूप से बढ़ी थी।

    कोर्ट ने कहा कि चालू मीटर ही इस आरोप को गलत साबित करता है कि कनेक्शन काटने के बाद बिजली गैर-कानूनी तरीके से दोबारा चालू की गई।

    अदालत ने कहा:

    “इससे साफ़ पता चलता है कि याचिकाकर्ता बेईमानी की नीयत से बिजली का इस्तेमाल नहीं कर रहा था, बल्कि वह ईमानदारी से इसका इस्तेमाल कर रहा था। याचिकाकर्ता के खिलाफ़ बस एक ही बात है कि उसने SBPDCL का बकाया बिजली बिल नहीं भरा था।”

    यह मानते हुए कि विवाद मुख्य रूप से बिजली के बकाया बिल की वसूली से जुड़ा था, अदालत ने कहा कि सामने आए तथ्यों से ज़्यादा से ज़्यादा एक सिविल देनदारी (दीवानी दायित्व) का मामला बनता है, न कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 135 के तहत कोई आपराधिक अपराध।

    इसके बाद हाईकोर्ट ने FIR रद्द की।

    Case Title: Md. Shahid Imam v. State of Bihar and Ors.

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