खांसी की दवा वाले मामलों में NDPS Act का लगातार दुरुपयोग: पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जमानत मंजूर

Amir Ahmad

4 April 2026 12:42 PM IST

  • खांसी की दवा वाले मामलों में NDPS Act का लगातार दुरुपयोग: पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जमानत मंजूर

    पटना हाईकोर्ट ने खांसी की दवा से जुड़े मामलों में NDPS Act के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पुलिस इस कानून का लगातार दुरुपयोग कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सीमा के भीतर कोडीन युक्त कफ सिरप के मामले NDPS Act के तहत नहीं बल्कि औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत आते हैं।

    जस्टिस अशोक कुमार पांडेय जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता को मानसी थाना कांड संख्या 218/2025 में आरोपी बनाया गया। प्रारंभ में मामला बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था जिसे बाद में NDPS Act की धाराओं में परिवर्तित किया गया।

    अभियोजन के अनुसार याचिकाकर्ता की स्कॉर्पियो गाड़ी से 1200 बोतल कफ सिरप (प्रत्येक 100 मिलीलीटर) बरामद की गई जिसमें कोडीन पाया गया। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को झूठा फंसाया गया और बरामदगी उसके वास्तविक कब्जे से नहीं हुई। साथ ही यह भी कहा गया कि जब्ती में स्वतंत्र गवाह नहीं थे और अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

    याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि संबंधित कफ सिरप में कोडीन की मात्रा लगभग 0.2 प्रतिशत है, जो केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार 2.5 प्रतिशत की सीमा से काफी कम है। ऐसे में यह पदार्थ NDPS Act के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में नहीं आता।

    राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि पूरे मिश्रण की मात्रा को आधार मानकर इसे वाणिज्यिक मात्रा माना जाना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

    अदालत ने कहा कि जब संबंधित पदार्थ ही NDPS Act की परिभाषा में नहीं आता तो उसकी मात्रा का सवाल ही नहीं उठता। केंद्र सरकार को ऐसे पदार्थों को छूट देने का अधिकार है और इस मामले में कफ सिरप निर्धारित सीमा के भीतर है।

    हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,

    “यह बेहद आश्चर्यजनक है कि कोडीन युक्त कफ सिरप के मामलों में पुलिस लगातार NDPS Act के तहत मुकदमा दर्ज कर रही है, जबकि निर्धारित सीमा से कम होने पर यह प्रतिबंधित श्रेणी में नहीं आता। ऐसे मामले केवल औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के उल्लंघन के होते हैं।”

    अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों में लाइसेंस और रिकॉर्ड से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन हो सकता है लेकिन इन्हें गंभीर मादक पदार्थ अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमानत प्रदान की

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