'सरकारी मान्यता' का मतलब भारतीय अधिकारियों से मान्यता, नेपाल के संस्थान का सर्टिफिकेट PDS लाइसेंस के लिए मान्य नहीं: पटना हाईकोर्ट
Shahadat
21 Aug 2026 9:54 AM IST

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि जहां पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) लाइसेंस के लिए "सरकार" से मान्यता प्राप्त एजुकेशनल सर्टिफिकेट की ज़रूरत होती है, वहां इस शब्द का मतलब भारत सरकार या भारत के अंदर या उसके नियंत्रण वाले अधिकारियों से होता है।
जस्टिस गिरीश कुमार की सिंगल जज बेंच ने उस उम्मीदवार की उम्मीदवारी खारिज करने के फैसले को सही ठहराया, जिसने नेपाल के एक संस्थान से कंप्यूटर सर्टिफिकेट हासिल किया।
याचिकाकर्ता ने PDS की खाली दुकान के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया और अपने आवेदन के साथ बेसिक कंप्यूटर डिग्री सर्टिफिकेट जमा किया। यह सर्टिफिकेट त्रिवेणी-6, रानीनगर, नवलपरासी, लुंबिनी, नेपाल स्थित गोल्डन कंप्यूटर एंड एजुकेशनल सेंटर द्वारा जारी किया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह योग्यता की शर्तों को पूरा करता था और मेरिट लिस्ट में चुने गए उम्मीदवार से ऊपर था। उसने तर्क दिया कि उसकी उम्मीदवारी सिर्फ़ इसलिए खारिज कर दी गई क्योंकि उसका कंप्यूटर सर्टिफिकेट नेपाल से लिया गया।
चुने गए उम्मीदवार सिकंदर अंसारी ने इस याचिका का विरोध किया। उसने कहा कि जहां याचिकाकर्ता का सर्टिफिकेट नेपाल के एक संस्थान द्वारा जारी किया गया, वहीं उसका अपना कंप्यूटर सर्टिफिकेट भारत के एक अधिकृत संस्थान द्वारा जारी किया गया।
कोर्ट ने गौर किया कि बगाह के सब-डिविजनल ऑफिसर ने 30 जनवरी, 2018 को एक आदेश जारी किया, जिसमें उम्मीदवार की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन का सरकार से मान्यता प्राप्त होना ज़रूरी था। कोर्ट ने यह भी देखा कि याचिकाकर्ता को इस आदेश के बारे में पता था और वह पहले भी मेरिट लिस्ट में अपनी स्थिति और कंप्यूटर सर्टिफिकेट से जुड़ी आपत्ति को लेकर हाईकोर्ट जा चुका था। हालांकि, उसने कभी 2018 के आदेश को चुनौती नहीं दी थी।
कोर्ट ने 2018 के आदेश को डिविजनल कमिश्नर के उस बाद के फैसले की "नींव" बताया, जिसमें याचिकाकर्ता की रिवीजन याचिका खारिज कर दी गई।
संविधान के अनुच्छेद 12 का ज़िक्र करते हुए हाईकोर्ट ने कहा:
“अनुच्छेद 12 को साफ़ तौर पर पढ़ने से पता चलता है कि 'सरकार' शब्द में राज्य और भारत के क्षेत्र में या भारत सरकार के नियंत्रण में आने वाले सभी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण शामिल हैं... इस मामले में आदेश के पैराग्राफ-13 में साफ़ तौर पर बताया गया... कि शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को सरकार द्वारा मान्यता दी जाएगी, जिसका मतलब है भारत सरकार या भारत के क्षेत्र में या भारत सरकार के नियंत्रण में आने वाले कोई भी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण।”
इसलिए कोर्ट ने माना कि डिविज़नल कमिश्नर ने याचिकाकर्ता की रिविज़न याचिका खारिज करते समय ज़रूरत की सही व्याख्या की थी, क्योंकि उनका कंप्यूटर प्रमाणपत्र नेपाल से लिया गया था और भारत में किसी सरकार-मान्यता प्राप्त संस्थान से नहीं था।
कमिश्नर के आदेश में कोई कमी या गड़बड़ी न पाते हुए हाईकोर्ट ने रिट याचिका खारिज की।
Case Title: Samim Mansuri v. State of Bihar and Ors.


