“हॉस्टलों में लड़कियों की सुरक्षा पर बिहार पुलिस के सर्कुलर में नियमों का पालन न करने पर सज़ा का कोई प्रावधान नहीं, इसे लागू किया जाना चाहिए”: हाईकोर्ट

Shahadat

6 May 2026 10:01 AM IST

  • “हॉस्टलों में लड़कियों की सुरक्षा पर बिहार पुलिस के सर्कुलर में नियमों का पालन न करने पर सज़ा का कोई प्रावधान नहीं, इसे लागू किया जाना चाहिए”: हाईकोर्ट

    पटना हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि निजी हॉस्टलों और लॉज में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा के उपायों के संबंध में बिहार पुलिस द्वारा जारी सर्कुलर में नियमों का पालन न करने पर किसी भी तरह की सज़ा का कोई प्रावधान नहीं है। इस बात पर ज़ोर दिया कि इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए और इस पर आगे की कार्रवाई भी होनी चाहिए।

    चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डिवीज़न बेंच बिहार राज्य में लड़कियों के हॉस्टलों और लॉज में रहने वाली स्टूडेंट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी सलाह और दिशा-निर्देशों से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।

    यह मामला 04.02.2026 को बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा पुलिस महानिदेशक की मंज़ूरी से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमज़ोर वर्ग) के माध्यम से जारी किए गए सर्कुलर से जुड़ा है। इस सर्कुलर को 10.04.2026 के पिछले आदेश के बाद कोर्ट के सामने पेश किया गया।

    सर्कुलर में यह बताया गया कि हाल के दिनों में, शिक्षा के उद्देश्य से हॉस्टलों और लॉज में रहने वाली लड़कियों और महिलाओं के साथ कुछ आपराधिक घटनाएं हुई हैं। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि राज्य के लिए, विशेष रूप से पुलिस के लिए, उनके लिए एक सुरक्षित माहौल मुहैया कराने हेतु एहतियाती कदम उठाना बेहद ज़रूरी है।

    सर्कुलर में लड़कियों के हॉस्टलों और लॉज के संचालन के संबंध में सलाह के तौर पर कुछ निर्देश जारी किए गए। इनमें ऐसी जगहों का अनिवार्य पंजीकरण और सत्यापन, कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, CCTV कैमरों जैसे सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, उचित रोशनी, साफ-सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करना, आने-जाने वालों पर नियंत्रण रखना (जिसमें कुछ खास जगहों पर पुरुषों के प्रवेश पर रोक शामिल है) और स्टूडेंट्स व कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करना शामिल था।

    सर्कुलर का अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि हालांकि विस्तृत निर्देश जारी किए गए, लेकिन इसमें इस बात का कोई ज़िक्र नहीं था कि अगर ऐसे हॉस्टलों या लॉज का प्रबंधन पंजीकरण और अन्य सुरक्षा उपायों सहित ज़रूरी शर्तों का पालन करने में विफल रहता है तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार के वकील ने यह स्वीकार किया कि इस पहलू पर ध्यान नहीं दिया गया और इस संबंध में ज़रूरी संशोधन करने की आवश्यकता होगी।

    कोर्ट ने राज्य सरकार से आगे यह भी पूछा कि क्या उसने बिहार में चल रहे ऐसे निजी लड़कियों के हॉस्टलों और लॉज की संख्या, वे किन ज़िलों में स्थित हैं, और वे किन पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस बारे में कोई जानकारी (निर्देश) हासिल की है।

    राज्य सरकार के सीनियर वकील ने इस संबंध में ज़रूरी जानकारी हासिल करने के लिए कोर्ट से कुछ और समय मांगा। प्रभावी ढंग से लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि सर्कुलर में ही यह शर्त है कि निर्देशों के आधार पर की गई कार्रवाई और उससे जुड़ी रिपोर्ट हर महीने की 15 तारीख तक भेजी जानी चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर राज्य सरकार कोर्ट को बताए कि पुलिस अधीक्षकों और ज़िले के अन्य संबंधित अधिकारियों से ऐसी कितनी रिपोर्ट मिली हैं।

    कोर्ट ने आगे कहा कि इस PIL में उठाया गया मुद्दा काफ़ी संवेदनशील है, जिसका मकसद पढ़ाई या रोज़गार के लिए निजी हॉस्टल और लॉज में रहने वाली लड़कियों और महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाना है।

    इसलिए इस सर्कुलर को पूरी सख़्ती से लागू किया जाना चाहिए और इसके लिए ज़रूरी कदम उठाए जाने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सर्कुलर का उल्लंघन होता है तो प्रबंधन के ख़िलाफ़ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस कार्रवाई में जुर्माना या दंड लगाना, और अगर ज़रूरी हो तो ऐसे हॉस्टल या लॉज को बंद कर देना भी शामिल हो सकता है।

    इस मामले पर आगे विचार करने के लिए इसे 11.05.2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।

    Case Title: Madhav Raj (In Person) v. State of Bihar and Ors.

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