POCSO केस में वीडियो प्रसारण पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक, कहा- 'TRP से ज्यादा जरूरी बच्चों की सुरक्षा'

  • POCSO केस में वीडियो प्रसारण पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक, कहा- TRP से ज्यादा जरूरी बच्चों की सुरक्षा

    मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (25 सितंबर) को ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि उर्फ Gem Granite Veeramani से जुड़े POCSO मामले में मीडिया संस्थानों को मामले से संबंधित वीडियो प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक दिया। हालांकि, कोर्ट ने मीडिया को मामले के प्रभावों और बाल यौन शोषण जैसे व्यापक मुद्दों पर बहस करने की अनुमति दी है।

    जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच के महत्वपूर्ण चरण में ऐसे वीडियो का प्रसारण उन अन्य पीड़ित बच्चों पर "chilling effect" डाल सकता है, जो पुलिस के सामने आने से डर सकते हैं।

    कोर्ट ने कहा कि मीडिया को मामले की रिपोर्टिंग का अधिकार है, लेकिन मीडिया ट्रायल नहीं हो सकता। आरोपी दोषी है या नहीं, इसका फैसला अदालत करेगी, मीडिया नहीं।

    "TRP से ज्यादा जरूरी जीवन में कुछ और भी है। बच्चों को सुरक्षित रखा जाए। संवेदनशीलता दिखाइए।"

    कोर्ट ने यह भी कहा कि चैनल मामले पर बहस कर सकते हैं, लेकिन मामले से जुड़े स्पष्ट/आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित किए बिना।

    जांच के दौरान वीडियो प्रसारण पर कोर्ट की चिंता

    कोर्ट ने कहा कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मामले में पहले से सामने आए पीड़ितों के अलावा और भी पीड़ित हो सकते हैं या नहीं। ऐसे में जांच से जुड़ी जानकारी, तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक होने से संभावित पीड़ित पुलिस के सामने आने से हिचक सकते हैं।

    कोर्ट ने मीडिया को यह भी याद दिलाया कि रिपोर्टिंग के अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है—पीड़ित बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ आरोपी के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

    हालांकि NGO ने John Doe Order की मांग की थी, कोर्ट ने फिलहाल ऐसा आदेश जारी नहीं किया। इसके बजाय मीडिया को संबंधित वीडियो प्रकाशित/प्रसारित करने से रोकते हुए चैनलों को बाल यौन शोषण के प्रभावों पर सामान्य चर्चा करने की अनुमति दी।

    SIT को हर सप्ताह प्रेस रिलीज जारी करने का निर्देश

    कोर्ट ने मामले की जांच कर रही SIT को हर सप्ताह एक प्रेस रिलीज जारी करने का निर्देश दिया, ताकि जनता को जांच में पुलिस द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मिलती रहे।

    राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि पुलिस वीडियो लीक करने वाले लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया में है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा कि वीडियो पुलिस की ओर से लीक नहीं हुए हैं।

    ऑनलाइन उपलब्ध वीडियो हटाने के लिए राज्य पुलिस ने Google और Meta से भी संपर्क किया है। केंद्र सरकार ने भी कंटेंट हटाने के लिए उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।

    India Today ने कोर्ट को बताया कि मामले पर चर्चा करते समय POCSO और IT Act का पालन किया गया है। वहीं, Republic TV ने कहा कि जानकारी मिलने के बाद संबंधित वीडियो हटा दिए गए।

    क्या है मामला?

    पुलिस के अनुसार, 28 अगस्त को वीरमणि और उनके दो सहयोगियों को नाबालिग लड़कियों से कथित बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को एक USB ड्राइव मिली थी, जिसमें कथित तौर पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण से संबंधित वीडियो थे।

    मामले में POCSO Act, IPC और IT Act की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। Tulir NGO ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर संवेदनशील वीडियो के प्रसार पर रोक, पीड़ितों की पहचान और निजता की सुरक्षा तथा वीडियो लीक की जांच की मांग की थी।

    हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को तय की है।

    इस खबर को अंग्रेज़ी में क्लिक करें

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story