चुनाव प्रचार में बच्चों को शामिल न करने के ECI के निर्देश कानूनी रूप से बाध्यकारी, उम्मीदवारों को इनका पालन करना होगा: मद्रास हाईकोर्ट
Shahadat
7 Nov 2026 12:59 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि चुनाव के समय भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा उम्मीदवारों को दिए गए निर्देश, 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' (Representation of People Act) के तहत आयोग की वैधानिक शक्तियों का हिस्सा हैं, इसलिए ये कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं। [2026 LiveLaw (Mad) 357]
जस्टिस के. कुमारेश बाबू ने कहा कि ये निर्देश उम्मीदवारों पर बाध्यकारी होंगे। कोर्ट ने TVK विधायक विजयकुमार का वह दावा खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों को शामिल न करने के ECI के निर्देश का उल्लंघन करना 'चुनाव अपराध' नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने कहा,
"एक तर्क यह दिया गया कि चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों को शामिल न करने के निर्देश दिए गए। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के तहत वैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए उम्मीदवारों को दिए गए निर्देश उन पर बाध्यकारी होते हैं, क्योंकि इन्हें कानूनी बल प्राप्त है।"
कोर्ट तिरुवेरुम्बुर (सामान्य) विधानसभा क्षेत्र से TVK विधायक विजयकुमार (उर्फ) नवलपट्टू एस. विजी द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई कर रहा था। इस आवेदन में DMK के अनबिल महेश द्वारा दायर वह चुनाव याचिका खारिज करने की मांग की गई, जिसमें विजी की जीत को चुनौती दी गई।
विजी ने तर्क दिया कि महेश ने अपनी चुनाव याचिका में ऐसा कुछ भी पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि चुनाव परिणाम पर इसका कोई बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि जब यह नहीं बताया गया कि चुनाव परिणाम कैसे प्रभावित हुआ, तो इस चुनाव याचिका को सुनवाई (ट्रायल) के लिए भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।
महेश के इस तर्क पर कि विजी ने चुनाव प्रचार में बच्चों का उपयोग न करने के ECI के निर्देशों का उल्लंघन किया, विजी ने दलील दी कि केवल निर्देशों का उल्लंघन चुनाव रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों में यह नहीं बताया गया कि उल्लंघन करने पर क्या परिणाम होंगे; ज्यादा-से-ज्यादा इसे केवल एक 'चुनाव अपराध' माना जा सकता है, और कुछ नहीं। दूसरी ओर, महेश की तरफ से यह तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग द्वारा दिए गए निर्देश संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियों से आते हैं, और ये रिटर्निंग ऑफिसर तथा उम्मीदवार, दोनों पर बाध्यकारी हैं।
अदालत ने कहा कि महेश द्वारा उठाए गए मुद्दों का चुनाव पर कोई बड़ा असर पड़ा है या नहीं, इसकी जांच तभी की जा सकती है, जब इन मुद्दों को सही साबित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि विजी द्वारा नियमों के उल्लंघन के दावों की सच्चाई की जांच केवल सुनवाई (ट्रायल) के दौरान ही की जा सकती है।
अदालत ने आगे कहा कि अगर यह पाया जाता है कि चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन हुआ है तो इसका चुनाव पर बड़ा असर पड़ सकता है; और इस बारे में कोई भी फैसला चुनाव याचिका की सुनवाई पूरी होने के बाद ही लिया जा सकता है।
इस तरह अदालत ने चुनाव याचिका को खारिज करने से इनकार किया और विजी की अर्जी खारिज की। साथ ही अदालत ने विजी को निर्देश दिया कि वह 4 सप्ताह के भीतर चुनाव याचिका पर अपना जवाब दाखिल करें।
Case Title : Vijayakumar (A) Navalpattu S.Viji v Anbil Mahesh Poyyamozhi

