त्विशा शर्मा मौत मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
Shahadat
26 Oct 2026 8:29 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी बहू त्विशा शर्मा की दहेज हत्या के मामले में आरोपी, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।
इस मामले में शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 80(2) (दहेज हत्या), 85 (क्रूरता) और 3(5) (समान इरादा) के तहत FIR दर्ज की गई। इसके साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 भी लगाई गईं। बाद में जांच CBI को सौंप दी गई।
सुनवाई के दौरान, सिंह के वकील ने CBI पर आरोप लगाया कि उसने पूरी बातचीत पर विचार करने के बजाय, केवल उन WhatsApp चैट का सहारा लिया जो उनके मामले का समर्थन करती थीं। वकील ने मृतका के भेजे गए मैसेज का हवाला देते हुए तर्क दिया कि आरोप उसके पति, समर्थ सिंह के खिलाफ है।
मृतका की अपने पिता के साथ हुई आखिरी फोन कॉल का ट्रांसक्रिप्ट पढ़ते हुए, सिंह के वकील ने कहा कि त्विशा ने अपने पति को आक्रामक और हिंसक बताया था और अपने माता-पिता से जल्द-से-जल्द उसके पास आने की गुहार लगाई।
वकील ने तर्क दिया,
"यह स्पष्ट रूप से मेरी मुवक्किल को निर्दोष साबित करता है; जो कुछ भी कहा जा रहा है, वह पति के खिलाफ कहा जा रहा है।"
जमानत याचिका का विरोध करते हुए CBI की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) सुनील जैन ने इस दावे को खारिज किया कि सिंह केवल दर्शक थीं और आत्महत्या में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंह ने ही उन घटनाओं को उकसाया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसे पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जो इस आरोप की पुष्टि करते हैं।
जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों का हवाला देते हुए जैन ने यह भी आरोप लगाया कि सिंह ने खुद समानांतर जांच (Parallel Investigation) की थी। उन्होंने सिंह को प्रभावशाली व्यक्ति बताया।
ASG ने मृतका के फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और व्यवहार विश्लेषण (Behavioural Inalysis) से जुड़ी रिपोर्ट का भी हवाला दिया। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि मृतका मानसिक क्रूरता, निराशा और समर्थन की कमी का सामना कर रही थी। आपत्ति जताने वाले पक्ष, यानी ट्विशा के पिता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि सिंह मुकदमे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं या सबूतों और गवाहों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।
उन्होंने कहा,
"कोई यह नहीं बता सकता कि आगे चलकर कोई व्यक्ति कैसा व्यवहार करेगा। लेकिन आपका पिछला बर्ताव इस बात का संकेत है कि आपसे आगे किस तरह के व्यवहार की उम्मीद की जा सकती है।"
Case Title : Giribala Singh v State of Madhya Pradesh

