Section 166 MV Act | दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रहता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Shahadat
27 March 2026 8:41 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से मोटर दुर्घटना दावा याचिका दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रह जाती है।
जस्टिस हिरदेश की बेंच ने यह टिप्पणी की:
"...मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर दावा याचिका में दोषी वाहन का ड्राइवर आवश्यक पक्षकार होता है। ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा याचिका दोषपूर्ण हो जाती है और सुनवाई योग्य नहीं रहती।"
राज्य सरकार ने ग्वालियर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accidents Claims Tribunal) द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। इस फैसले में दावा करने वाले को 37,000 रुपये का मुआवज़ा दिया गया। साथ ही दावा याचिका दायर करने की तारीख से उस पर ब्याज भी देने का आदेश दिया गया।
मामले के तथ्यों के अनुसार, दावा करने वाला रात 11 बजे एक बारात में शामिल होकर जा रहा था। जब बारात 'नया बाज़ार' पहुंची तो एक सफ़ेद रंग की पुलिस गाड़ी लापरवाही और तेज़ी से चलाते हुए आई और उसने दावा करने वाले के बाएं पैर में टक्कर मार दी, जिससे उसे चोटें आईं। इसके बाद दोषी वाहन के ड्राइवर के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई।
इसके बाद मुआवज़े की मांग करते हुए दावा याचिका दायर की गई। दावा अधिकरण ने मामले से जुड़े मुद्दों को तय किया और सबूतों की जांच करने के बाद प्रतिवादी/दावा करने वाले के पक्ष में मुआवज़े का फैसला सुनाया।
राज्य सरकार ने यह दावा करते हुए अपील दायर की कि मुआवज़े का फैसला दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार बनाए बिना ही सुना दिया गया। इसलिए यह दावा सुनवाई योग्य नहीं था।
बेंच ने फैसला दिया कि किसी भी दावा याचिका में दावा करने वाले को यह साबित करना होता है कि दोषी वाहन के ड्राइवर का आचरण लापरवाही भरा था। इसलिए घायल व्यक्ति या उसके कानूनी प्रतिनिधियों को मुआवज़ा देने के लिए दावा करने वाले को यह साबित करना ज़रूरी है कि दुर्घटना दोषी वाहन के ड्राइवर की तेज़ी और लापरवाही भरी हरकत के कारण हुई थी।
बेंच ने आगे यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने उक्त ड्राइवर को पक्षकार न बनाए जाने पर आपत्ति जताई, लेकिन इसके बावजूद दावा याचिका पर फैसला सुना दिया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा:
"उपर्युक्त चर्चा के आधार पर, यह फैसला दिया जाता है कि दोषी वाहन का ड्राइवर एक आवश्यक पक्षकार है, क्योंकि लापरवाही के सभी आरोप ड्राइवर पर ही लगाए गए। ड्राइवर को अपनी बात रखने का कोई भी अवसर दिए बिना उस पर लापरवाही का आरोप सिद्ध नहीं किया जा सकता।"
अतः, न्यायालय ने दावा अधिकरण द्वारा पारित अधिनिर्णय रद्द किया और अपील स्वीकार की।
Case Title: State of MP v Smt Premwati Jatav [MA-265-2006]

