किताबों की कीमतें और बेचने वालों की जानकारी न देने का मामला: हाई कोर्ट ने प्रीस्कूल डायरेक्टर के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार
Shahadat
29 May 2026 10:30 AM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्रीस्कूल' के डायरेक्टर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। डायरेक्टर पर कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप है। कलेक्टर ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शैक्षणिक सामग्री की मनमानी बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रीस्कूल की किताबों, उनकी कीमतों और बेचने वालों की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का आदेश दिया था।
'कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्रीस्कूल' द्वारा दायर रिट याचिका खारिज करते हुए जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने टिप्पणी की कि स्कूल का यह बचाव—कि उसकी वेबसाइट फ्रेंचाइज़र के किसी तीसरे पक्ष के वेबसाइट डेवलपर द्वारा नियंत्रित की जाती है, इसलिए याचिकाकर्ता कलेक्टर द्वारा अनिवार्य की गई जानकारी सार्वजनिक करने में असमर्थ थे—"पूरी तरह से अस्पष्ट, टालमटोल वाला और गलत धारणा पर आधारित" था।
बेंच ने टिप्पणी की:
"सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ता फ्रेंचाइज़ी के तौर पर काम कर रहे हैं, उन्हें उस संस्थान के प्रति अपने वैधानिक और नियामक दायित्वों से मुक्ति नहीं मिल जाती, जिसका संचालन वे कर रहे हैं। छात्र याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रबंधित संस्थान में ही प्रवेश लेते हैं। सभी शैक्षणिक गतिविधियां उन्हीं की देखरेख और प्रशासन के तहत संचालित होती हैं। इसलिए वेबसाइट के कथित डेवलपर/ऑपरेटर पर ज़िम्मेदारी डालकर सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए गए वैध निर्देशों का पालन करने से बचा नहीं जा सकता।"
यह याचिका प्रीस्कूल और 'पालक एकेडमी ऑफ लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा दायर की गई। इसमें 'रिट ऑफ मैंडमस' (परमादेश) की मांग की गई थी, ताकि राज्य के अधिकारियों को स्कूल के शैक्षणिक कामकाज, जिसमें उसका निर्धारित पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और लाइसेंस प्राप्त अध्ययन सामग्री का उपयोग शामिल है, में हस्तक्षेप करने से रोका जा सके।
याचिकाकर्ताओं ने 26 मार्च, 2026 के 'कारण बताओ नोटिस' (Show-Cause Notice) रद्द करने की भी मांग की। साथ ही उससे जुड़ी बाद की कार्यवाहियों को भी रद्द करने की मांग की। इन कार्यवाहियों में संस्थान के डायरेक्टर के खिलाफ BNSS की धारा 223(a) के तहत दर्ज FIR भी शामिल है, जो किसी लोक सेवक द्वारा जारी किए गए आदेश की अवहेलना से संबंधित है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता नंबर 1 'कंगारू प्रीस्कूल', वर्ष 2015 में स्थापित किया गया; जबकि याचिकाकर्ता नंबर 2 'पालक एकेडमी' वह कंपनी है, जो इस प्रीस्कूल का स्वामित्व रखती है और उसका संचालन करती है। इस याचिका के माध्यम से अधिकारियों द्वारा FIR दर्ज करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 26 मार्च, 2026 को एक 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया, जिसमें कलेक्टर के निर्देशों का पालन न करने का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने 27 मार्च, 2026 को एक विस्तृत जवाब दाखिल किया, जिसमें उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बावजूद, अधिकारियों ने उनके स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना ही, 30 मार्च, 2026 को यांत्रिक रूप से FIR दर्ज की।
आगे यह तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता संस्था केवल 'कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्रीस्कूल' की फ्रेंचाइजी इकाई के रूप में कार्य करती थी। उसकी अपनी कोई स्वतंत्र वेबसाइट नहीं थी, न ही वह किसी स्वतंत्र वेबसाइट का संचालन करती थी।
वकील ने तर्क दिया कि सभी फ्रेंचाइजी संस्थाओं के लिए शेयर वेबसाइट बनाई गई, जिसका संचालन और जिस पर पूर्ण नियंत्रण 'लाइटहाउस लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड' का था; इस वेबसाइट का कॉपीराइट भी उसी कंपनी के पास था। परिणामस्वरूप, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वेबसाइट के संचालन, प्रबंधन या उसकी सामग्री पर उनका कोई अधिकार नहीं था।
याचिकाकर्ता ने यह तर्क भी दिया कि फ्रेंचाइजी के तौर पर उनकी भूमिका केवल फ्रेंचाइजर द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम को लागू करने तक ही सीमित थी। साथ ही शैक्षिक सामग्री के प्रकाशन, मुद्रण, मूल्य निर्धारण या बिक्री में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी।
इन दलीलों को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि कलेक्टर के निर्देश प्री-स्कूल की किताबों और विक्रेताओं के संबंध में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से थे। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता उन निर्देशों का पालन करने के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे थे।
अदालत ने ज़ोर देकर कहा,
"याचिकाकर्ताओं का पूरा बचाव इस दलील पर आधारित है कि स्कूल की वेबसाइट, वेबसाइट डेवलपर के नियंत्रण में है और याचिकाकर्ताओं का उस पर कोई अधिकार नहीं है। इस अदालत की सुविचारित राय में ऐसा स्पष्टीकरण पूरी तरह से अस्पष्ट, टालमटोल वाला और भ्रामक है।"
अदालत ने आगे कहा कि केवल फ्रेंचाइजी के रूप में काम करने से याचिकाकर्ता, उनके द्वारा चलाए जा रहे संस्थान के प्रति अपने वैधानिक दायित्वों से मुक्त नहीं हो जाते। चूंकि स्टूडेंट्स को याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रबंधित संस्थान में एडमिशन दिया गया था और सभी शैक्षिक गतिविधियां उनकी देखरेख में की जाती थीं, इसलिए सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए गए वैध निर्देशों का पालन करने की ज़िम्मेदारी, वेबसाइट डेवलपर या ऑपरेटर पर डालकर उससे बचा नहीं जा सकता।
अदालत ने रेखांकित किया,
"यह तर्क कि वेबसाइट के डेवलपर्स या ऑपरेटरों के पास विशेष अधिकार हैं। इसलिए याचिकाकर्ता जानकारी सार्वजनिक करने में असमर्थ थे, भी सारहीन है। याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत जवाब से ऐसा कोई ठोस कदम उठाया जाना प्रतीत नहीं होता, जिससे कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो सके। इस प्रकार, दिया गया स्पष्टीकरण ज़िम्मेदारी से बचने का प्रयास मात्र है।"
संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए अदालत ने पाया कि इस मामले में कोई असाधारण परिस्थितियां नहीं हैं। इसलिए इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। अतः, अदालत ने याचिका खारिज की।
Case Title: Kangaroo Kids International Pre School v State of Madhya Pradesh, WP-13805-2026

