पैकेज/कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी में अनलिमिटेड पैसेंजर लायबिलिटी तब तक कवर नहीं होती, जब तक पॉलिसी में ऐसा प्रावधान न हो: एमपी हाईकोर्ट

Shahadat

20 Aug 2026 8:23 PM IST

  • पैकेज/कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी में अनलिमिटेड पैसेंजर लायबिलिटी तब तक कवर नहीं होती, जब तक पॉलिसी में ऐसा प्रावधान न हो: एमपी हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पैकेज या कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी अपने आप में अनलिमिटेड लायबिलिटी (असीमित दायित्व) को कवर नहीं करती है, जिसमें वाहन में सवार यात्रियों के लिए अनलिमिटेड रिस्क (असीमित जोखिम) भी शामिल है, जब तक कि पॉलिसी में ऐसा प्रावधान न किया गया हो। [2026 LiveLaw (MP) 334]

    यह देखते हुए कि मालिक ने अनलिमिटेड रिस्क को कवर करने के लिए ज़्यादा प्रीमियम का भुगतान नहीं किया, जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा:

    "आज की कानूनी स्थिति यह है कि इंश्योरेंस कंपनी की लायबिलिटी इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों और नियमों पर निर्भर करेगी और केवल पॉलिसी को कॉम्प्रिहेंसिव/पैकेज पॉलिसी कहने से ही वाहन में सवार यात्री का अनलिमिटेड रिस्क कवर नहीं होगा। यदि पॉलिसी की शर्तों में इंश्योरेंस कंपनी की अनलिमिटेड लायबिलिटी का प्रावधान है तो ही इंश्योरेंस कंपनी पूरे मुआवज़े के भुगतान के लिए ज़िम्मेदार होगी, अन्यथा इंश्योरेंस कंपनी की लायबिलिटी पॉलिसी की शर्तों तक ही सीमित रहेगी।"

    यह आदेश एमपी स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा दायर विविध अपील में पारित किया गया, जिसमें मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी गई। ट्रिब्यूनल ने दावेदारों का दावा आंशिक रूप से स्वीकार किया और ₹28 लाख का मुआवज़ा दिया। साथ ही यह निर्देश दिया कि इंश्योरेंस कंपनी की लायबिलिटी केवल ₹1 लाख तक सीमित थी।

    दावेदारों द्वारा इंश्योरेंस कंपनी की अनलिमिटेड लायबिलिटी घोषित करने और मुआवज़े की राशि बढ़ाने के लिए एक और विविध अपील दायर की गई।

    तथ्यों के अनुसार, 20 फरवरी 2012 को शाम लगभग 4 बजे मृतक रविंदर शाह एमपी स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रेसिडेंट गोविंद मालू के साथ इंदौर से भोपाल कार से यात्रा कर रहे थे। तेज़ गति से लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण कार पलट गई, और मृतक रविंद्र शाह को गंभीर चोटें आईं और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। अन्य यात्रियों को भी चोटें आईं।

    इस घटना की सूचना सीहोर ज़िले में दी गई और ड्राइवर ऋषि के ख़िलाफ़ अपराध दर्ज किया गया और उसके ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की गई। इसके बाद मृतक के परिवार ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत ड्राइवर, मालिक और बीमा कंपनी से ₹1.25 लाख के मुआवज़े की मांग करते हुए एक क्लेम याचिका दायर की। बीमा कंपनी ने दावा किया कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार उनकी देनदारी ₹1 लाख तक ही सीमित थी।

    ट्रिब्यूनल ने माना कि दुर्घटना ड्राइवर द्वारा कार को तेज़ी और लापरवाही से चलाने के कारण हुई, जिससे यात्री रवींद्र शाह की मौत हो गई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि क्लेम करने वाले ₹1.25 लाख का मुआवज़ा पाने के हकदार थे, लेकिन बीमा कंपनी की देनदारी ₹1 लाख तक ही सीमित थी।

    गाड़ी के मालिक/अपीलकर्ता ने एक विविध अपील दायर की और तर्क दिया कि बीमा कंपनी की देनदारी सीमित नहीं थी, क्योंकि मालिक की पूरी देनदारी की भरपाई करना उनकी ज़िम्मेदारी थी। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) के 16 नवंबर, 2009 के सर्कुलर का हवाला देते हुए मालिक ने तर्क दिया कि सर्कुलर के अनुसार, प्राइवेट कार पैकेज पॉलिसी जारी करते समय प्राइवेट गाड़ी में सवार लोगों के लिए मुआवज़े की पूरी देनदारी को कवर करना ज़रूरी है।

    मालिक की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि चूंकि मालिक ने कॉम्प्रिहेंसिव पैकेज खरीदा था, इसलिए बीमा कंपनी की ज़िम्मेदारी बनती थी और वे अपनी देनदारी से बच नहीं सकते थे।

    क्लेम करने वालों के वकील ने मालिक के तर्कों का समर्थन करते हुए कहा कि कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के कारण बीमा कंपनी की देनदारी असीमित थी।

    इंश्योरेंस कंपनी के वकील ने कहा कि जहां तक यात्री का सवाल है, 1988 के एक्ट की धारा 147 के प्रावधानों के अनुसार इंश्योरर (बीमा कंपनी) की लायबिलिटी सीमित है। हालांकि, इंश्योर्ड व्यक्ति (बीमाधारक) ज़्यादा प्रीमियम देकर यात्री के लिए भी ज़्यादा रिस्क कवर ले सकता है। लेकिन इंश्योरेंस पॉलिसी में ऐसी कोई शर्त न होने पर यात्रियों के मामले में इंश्योरर की लायबिलिटी को अनलिमिटेड नहीं माना जा सकता, और यह थर्ड-पार्टी रिस्क के प्रति कानूनी लायबिलिटी तक ही सीमित रहती है।

    नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम बालकृष्णन [2013 1 SCC 731] के सुप्रीम कोर्ट केस का ज़िक्र करते हुए कंपनी के वकील ने फिर से कहा कि 'एक्ट पॉलिसी' कॉम्प्रिहेंसिव/पैकेज पॉलिसी से अलग होती है।

    कोर्ट ने देखा कि इंश्योरेंस कंपनी ने गाड़ी में चार यात्रियों के रिस्क के लिए ₹200 का प्रीमियम लिया और कवर की गई लायबिलिटी प्रति यात्री केवल ₹1 लाख तक थी। कोर्ट ने माना कि अगर मालिक ने अनलिमिटेड रिस्क कवर करने के लिए ज़्यादा प्रीमियम नहीं दिया था तो किसी यात्री की मौत के लिए पूरे मुआवज़े की रकम के लिए कंपनी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

    इस प्रकार, बेंच ने माना,

    "इस मामले में मुआवज़े की सही और उचित रकम ₹37,62,833 होनी चाहिए, जबकि ट्रिब्यूनल ने ₹28,86,616 का अवार्ड दिया। इसलिए क्लेम करने वाले ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई रकम के अलावा ₹8,76,217 की बढ़ी हुई रकम पाने के हकदार हैं। नतीजतन, मालिक द्वारा दायर अपील एम.ए. नंबर 2467/2014 खारिज कर दी जाती है और क्लेम करने वालों द्वारा दायर अपील एम.ए. नंबर 151/2015 को ऊपर बताई गई हद तक आंशिक रूप से मंज़ूर किया जाता है।"

    Case Title: MP Mining Corporation v United India Insurance, MISC. APPEAL No. 2467 of 2014

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