'SC/ST Act के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं': हाईकोर्ट ने मारपीट के मामले में नर्मदापुरम बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को अग्रिम ज़मानत दी
Shahadat
24 Jun 2026 8:05 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को मारपीट के मामले में अग्रिम ज़मानत दी। इस मामले में उनके बेटे और चुने हुए कोषाध्यक्ष (जो अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय से है) शामिल है। कोर्ट ने पाया कि अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। [2026 LiveLaw (MP) 232]
चूंकि दोनों पक्ष ज़िला बार एसोसिएशन के चुने हुए सदस्य हैं, इसलिए जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की, लेकिन मध्यस्थता की कोशिश सफल नहीं हो सकी।
इसके बाद बेंच ने निर्देश दिया,
"चूंकि आवेदक के ख़िलाफ़ SC/ST Act के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता, इसलिए यह कोर्ट अग्रिम ज़मानत देने के पक्ष में है। तदनुसार, मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना आवेदक की ओर से दायर अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार की जाती है।"
आवेदक ज़िला बार एसोसिएशन के चुने हुए अध्यक्ष हैं, जबकि शिकायतकर्ता चुने हुए कोषाध्यक्ष हैं। 17 अप्रैल, 2026 को एक बैठक के दौरान विवाद हुआ, जिसके बाद बार एसोसिएशन के ग्रुप चैट में शिकायतकर्ता और आवेदक के बेटे के बीच व्हाट्सएप पर बहस हुई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आवेदक ने शिकायतकर्ता को अपशब्द कहे और चेतावनी दी कि उनके बेटे उस पर हमला करने के लिए आ रहे हैं। इसके बाद 17 अप्रैल, 2026 को जब शिकायतकर्ता अपने कार्यालय में एक वकील के साथ थे तो आवेदक के बेटे ज़बरदस्ती अंदर घुसे, अपशब्द कहे और शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की; ऐसा आरोप है।
आवेदक के वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि आवेदक न तो घटना स्थल पर मौजूद थे और न ही उन्होंने सीधे तौर पर शिकायतकर्ता को अपशब्द कहे।
राज्य के वकील ने तर्क दिया कि FIR में दिखाए अनुसार, आवेदक के कहने पर आरोपी व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता को चोट पहुंचाई। वकील ने तर्क दिया कि आवेदक ने अपने बेटों को शिकायतकर्ता पर हमला करने के लिए उकसाया। राज्य ने यह भी तर्क दिया कि चूंकि शिकायतकर्ता SC/ST समुदाय से है, इसलिए SC/ST Act के प्रावधान लागू किए गए, जिससे अग्रिम ज़मानत की स्वीकार्यता पर रोक लग गई।
कोर्ट ने पाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) शिकायतकर्ता के इस दावे के विपरीत है कि आरोपी ने उसे गाली-गलौज वाली कॉल की थी। बल्कि, CDR से पता चला कि शिकायतकर्ता ने ही आरोपी को कॉल किया।
इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और SC/ST Act के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। इसलिए कोर्ट ने अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी मंज़ूर की।
Case Title: Deepak Jain v State of Madhya Pradesh, MCRC-19533-2026

