केवल यह कहना कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B का पालन नहीं माना जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Praveen Mishra

29 Jun 2026 6:01 PM IST

  • केवल यह कहना कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B का पालन नहीं माना जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल यह दावा कर देना कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कोई एडिटिंग या छेड़छाड़ नहीं की गई है, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के तहत निर्धारित अनिवार्य कानूनी शर्तों का विकल्प नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तभी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, जब उसके साथ धारा 65B के अनुरूप विधिवत प्रमाणपत्र संलग्न हो।

    जस्टिस अमित सेठ की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा एक सीडी को प्रदर्श (Exhibit) के रूप में स्वीकार करने से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने पाया था कि सीडी के साथ दाखिल किया गया धारा 65B का प्रमाणपत्र कानून की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करता, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य स्वीकार्य नहीं है।

    हाईकोर्ट ने Arjun Panditrao Khotkar v. Kailash Kushanrao Gorantyal के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मोबाइल फोन से तैयार की गई सीडी "कंप्यूटर आउटपुट" और द्वितीयक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य है, जिसके लिए धारा 65B(2) और 65B(4) के अनुरूप प्रमाणपत्र अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इस कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी दस्तावेज़ की स्वीकार्यता किसी वैधानिक शर्त पर निर्भर करती है, तो ट्रायल कोर्ट उसे प्रदर्श के रूप में स्वीकार करने से पहले उसकी वैधता की जांच कर सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेशों को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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