एमपी हाईकोर्ट ने 'वर्क-चार्ज्ड' कर्मचारी के आश्रित की अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर फिर से विचार करने का आदेश दिया
Shahadat
2 Nov 2026 4:16 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एक दिवंगत 'वर्क-चार्ज्ड' (Work-Charged) या 'कंटिंजेंसी' (Contingency) कर्मचारी के आश्रित द्वारा की गई अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) की मांग पर फिर से विचार करें। कोर्ट ने कहा कि लागू नियमों और कानूनी सिद्धांतों के अनुसार इस दावे पर नए सिरे से विचार किए जाने की आवश्यकता है। [2026 LiveLaw (MP) 442]
जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने टिप्पणी की:
"यह कोर्ट मानता है कि इस मामले को सक्षम अधिकारी के पास वापस भेजा जाना चाहिए, ताकि वे लागू नीति और संबंधित न्यायिक फैसलों के अनुसार याचिकाकर्ता के दावे पर नए सिरे से विचार कर सकें।"
स्वर्गीय गिरधारी लाल पटेल के बेटे ने एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने वन मंडल अधिकारी (Van Mandal Officer) के 17 मई 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया गया। अधिकारी का तर्क था कि दिवंगत 'वर्क-चार्ज्ड' या 'कंटिंजेंसी' कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने का कोई प्रावधान नहीं है।
तथ्यों के अनुसार, याचिकाकर्ता के पिता की 15 जून 2022 को नौकरी के दौरान मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता ने पहले भी इस कोर्ट में रिट याचिका (WP 1216/2023) दायर की, जिसका निपटारा करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया।
इस निर्देश के बाद प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार किया और कहा कि 2014 के सर्कुलर के अनुसार, दिवंगत 'वर्क-चार्ज्ड' या 'कंटिंजेंसी' कर्मचारियों के आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के हकदार नहीं हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा 2016 में जारी किए गए बाद के सर्कुलर पर ठीक से विचार किए बिना पारित किया गया। उन्होंने कहा कि उक्त आदेश में 'वर्क-चार्ज्ड' और 'कंटिंजेंसी' प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति के दावों पर विचार करने का प्रावधान है, बशर्ते वे लागू योजना की शर्तों को पूरा करते हों।
राज्य की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि दिवंगत कर्मचारी एक 'वर्क-चार्ज्ड' या 'कंटिंजेंसी' कर्मचारी थे, और 2014 के सर्कुलर के क्लॉज 11.1 के तहत उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। हालाँकि, 2016 के सर्कुलर के तहत परिवार ₹2 लाख की सहायता राशि पाने का हकदार है। यह तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता की माँ को मिलने वाले लाभों के बारे में बताया गया, लेकिन उन्होंने उन्हें लेने से इनकार कर दिया।
अदालत ने गौर किया कि इसी अदालत की एक अन्य बेंच ने WP 3849/2020 मामले में यह दोहराया कि 'अनुकंपा नियुक्ति' (Compassionate Appointment) के दावे पर विचार उससे संबंधित लागू नीति के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अदालत ने 2016 के सर्कुलर पर भी विचार किया, जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार 'वर्क-चार्ज्ड' और 'कंटिंजेंसी' प्रतिष्ठानों में काम करने वाले मृत कर्मचारियों के आश्रितों को लागू 'अनुकंपा नियुक्ति' योजना की शर्तों और पैमानों के अनुसार, अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार कर सकती है।
बेंच ने कहा,
"इस तरह के दावों की जाँच करते समय 31.08.2016 का सर्कुलर काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। केवल 29.09.2014 के सर्कुलर में दिए गए 'बहिष्करण प्रावधान' (Exclusionary Provision) का हवाला देकर इस दावे का फैसला नहीं किया जा सकता। इसके लिए 31.08.2016 के सर्कुलर के निर्देशों, संबंधित प्रतिष्ठान पर उनकी लागू होने की स्थिति, और लागू नीति के तहत दावेदार की पात्रता की जाँच करना आवश्यक है।"
इस मामले में बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता के दावे को केवल 2014 के सर्कुलर के आधार पर खारिज कर दिया गया, जबकि 2016 के सर्कुलर और अन्य परिस्थितियों पर कोई विचार नहीं किया गया।
इसके अनुसार, बेंच ने याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की, विवादित आदेश रद्द किया और मामले को 'चीफ कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट' (प्रतिवादी संख्या 2) के पास वापस भेज दिया, ताकि वे इस पर नए सिरे से विचार कर सकें।
Case Title : Deepchand Patel v State of MP

